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Madras High Court ने Karur Stampede पीड़ितों को नौकरी देने का सरकारी आदेश रद्द किया

कोर्ट ने यह भी कहा कि इससे दूसरे लोगों के लिए भी ऐसी नौकरी की मांग करने का रास्ता खुल जाएगा।

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Monday, July 27, 2026

मद्रास हाई कोर्ट ने सोमवार को करूर भगदड़ के पीड़ितों के परिवारों को नौकरी देने के तमिलनाडु सरकार के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसा कदम संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि इससे दूसरे लोगों के लिए भी ऐसी नौकरी की मांग करने का रास्ता खुल जाएगा। कोर्ट ने कहा कि कई अन्य लोग दूसरे सरकारी विभागों में नौकरी की तलाश कर रहे हैं, और करूर भगदड़ में मारे गए लोगों के परिजनों को नौकरी देकर दूसरों को नज़रअंदाज़ करना सही नहीं होगा।
कोर्ट ने कहा कि यह बात न केवल नौकरी चाहने वाले सभी लोगों के लिए, बल्कि वेटिंग लिस्ट में शामिल लोगों और उन लोगों के लिए भी उतनी ही अहम है जिन्होंने नौकरी के दौरान अपने परिवार के सदस्य को खो दिया है। जब वेटिंग लिस्ट मौजूद हो, तो उनकी ज़रूरतों को नज़रअंदाज़ करके करूर घटना के पीड़ितों के परिवारों को मदद देना उचित नहीं है… हमारा मानना ​​है कि ये नियुक्तियां संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत देश के नागरिक को मिली गारंटी का सीधा उल्लंघन हैं। जैसा कि ‘लाइव लॉ’ ने बताया है।

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