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शुभेंदु अधिकारी बोले- “क्या लोकतंत्र का भविष्य संविदा कर्मचारियों के हाथों में सौंपा जा रहा है?

बंगाल में रिपोलिंग के दौरान संविदा कर्मचारी तैनात, मतगणना के लिए संविदा कर्मियों की नियुक्ति पर उठे सवाल

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Saturday, May 2, 2026

पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता और बीजेपी उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार को पिंगला और दासपुर विधानसभा क्षेत्रों में मतगणना के दिन संविदा कर्मचारियों को ड्यूटी पर तैनात करने को लेकर चिंता जताई. उन्होंने टीएमसी पर जनादेश में हेरफेर करने का आरोप लगाया और चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग की.

एक पोस्ट में अधिकारी ने लिखा, “क्या लोकतंत्र का भविष्य संविदा कर्मचारियों के हाथों में सौंपा जा रहा है? यह एक गंभीर चिंता का विषय है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पवित्रता पर सीधा हमला है. 227-पिंगला एसी और 230-दासपुर एसी के लिए जारी मतगणना आदेशों को देखकर मैं स्तब्ध हूं, जहां मतगणना कार्यों के लिए बड़ी संख्या में संविदा और अस्थायी कर्मचारियों को तैनात किया गया है.” उन्होंने मतदान की गिनती के लिए जिबिका सेवकों, सहायकों और संविदात्मक मतदान अधिकारी की तैनाती पर सवाल उठाए हैं.

बीजेपी नेता ने सवाल उठाए कि ईवीएम, वीवीपीएटी और डाक मतपत्रों को संभालने जैसे संवेदनशील कार्यों की जिम्मेदारी जिबिका सेवकों और सहायकों को कैसे सौंपी जा सकती है? ये पद स्वाभाविक रूप से राजनीतिक दबाव के प्रति संवेदनशील होते हैं. आदेशों से पता चलता है कि महत्वपूर्ण भूमिकाओं के लिए अस्थायी कर्मचारियों पर कितना भरोसा किया जा रहा है.

‘मतगणना में सरकारी कर्मचारियों को शामिल किया जाए’
उन्होंने आगे कहा कि पिंगला एसी (227), बिपालेंदु बेरा (जेएस), शंकर पहाड़ी (जेएस) और नबा कुमार अपिक (बीएलएस) जैसे संविदा कर्मचारी मतगणना टीमों में शामिल हैं. यहां तक ​​कि ‘रिजर्व टैगिंग’ में भी बीएलएए जैसे कर्मचारी लगे हुए हैं. ईवीएम मूवमेंट और यहां तक ​​कि ईवीएम/वीवीपीएटी की सीलिंग में भी सहायकों, वीएलई और संविदा पर नियुक्त डीईओ की भरमार है. सुवेंदु अधिकारी ने चुनाव आयोग से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि 4 मई को होने वाली मतगणना में नियमित सरकारी कर्मचारियों को शामिल किया जाए.

उन्होंने लिखा, “मुख्य चुनाव आयुक्त और मुख्य चुनाव अधिकारी पश्चिम बंगाल को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए, ताकि इन आदेशों में संशोधन किया जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि मतगणना प्रक्रिया में केवल स्थायी, नियमित सरकारी कर्मचारी ही शामिल हों, जिससे निष्पक्षता बनी रहे.” उन्होंने आगे कहा कि चुनाव आयोग को लोकतंत्र के संविदाकरण को रोकने के लिए कार्रवाई करनी चाहिए. हम जनता के जनादेश के साथ उन लोगों को छेड़छाड़ नहीं करने देंगे, जिनकी नौकरियां सत्ताधारी दल की मनमानी पर निर्भर करती हैं.

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