योग भारत की प्राचीन आध्यात्मिक विरासत है, जो केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के समग्र विकास का विज्ञान है। संस्कृत शब्द “युज्” से निर्मित योग का अर्थ है— आत्मा का परमात्मा से मिलन।
भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता में योगी को तपस्वियों, ज्ञानियों और कर्मियों से श्रेष्ठ बताते हुए योगमार्ग अपनाने का संदेश दिया है। आधुनिक युग में महावतार बाबाजी, लाहिड़ी महाशय, स्वामी श्रीयुक्तेश्वरजी तथा परमहंस योगानन्दजी की गुरु-परम्परा ने क्रियायोग के माध्यम से इस दिव्य विज्ञान को विश्वभर में पहुँचाया।
परमहंस योगानन्दजी द्वारा स्थापित योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया (YSS) आज भी क्रियायोग और वैज्ञानिक ध्यान पद्धतियों के माध्यम से लाखों लोगों को आत्मिक उन्नति और आंतरिक शान्ति का मार्ग दिखा रही है।
क्रियायोग के नियमित अभ्यास से व्यक्ति में विवेक जागृत होता है, चेतना का विस्तार होता है और वह सम्पूर्ण मानवता में एक ही परमात्मा का दर्शन करने लगता है। यही भावना विश्व-शान्ति और वैश्विक सद्भाव की आधारशिला है।
अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर आइए, योग को जीवन का हिस्सा बनाकर स्वस्थ, संतुलित और शांतिपूर्ण विश्व के निर्माण में अपना योगदान दें।
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