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वायरल वीडियो बनाम पुलिस प्रेस नोट, आखिर क्या है सच्चाई?

नौ महीने से न्याय की गुहार लगा रहे आशुतोष के परिवार ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Saturday, September 5, 2026

फर्रुखाबाद।

जनपद फर्रुखाबाद के थाना जहानगंज क्षेत्र के कोरीखेड़ा गांव में 10 वर्षीय आशुतोष की हत्या के करीब नौ माह बाद भी न्याय की मांग कर रहा परिवार एक बार फिर सुर्खियों में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के फर्रुखाबाद आगमन के दौरान परिवार अपनी फरियाद मुख्यमंत्री तक पहुंचाना चाहता था। इसी बीच गांव में पुलिस की कार्रवाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। अब वायरल वीडियो और पुलिस की ओर से जारी प्रेस नोट के बीच कथित अंतर को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामले में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि कैमरे में दिखाई दे रहे घटनाक्रम और पुलिस के आधिकारिक बयान में तस्वीर अलग-अलग नजर आ रही है। वायरल वीडियो में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी के बीच महिलाओं के साथ धक्का-मुक्की और एक युवक के साथ मारपीट जैसा दृश्य दिखाई दे रहा है। वीडियो को लेकर मृतक के परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि अपना समाचार पत्र वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।

प्रेस नोट में विवाद और न्यूनतम बल प्रयोग का जिक्र
वहीं शुक्रवार को पुलिस की ओर से जारी प्रेस नोट में घटनाक्रम को दो पक्षों के बीच विवाद, गाली-गलौज और मारपीट से जुड़ा बताया गया। पुलिस के अनुसार स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक न्यूनतम बल का प्रयोग किया गया। यहीं से पूरे मामले में सवालों का सिलसिला शुरू होता है। यदि पुलिस के अनुसार मामला दो पक्षों के विवाद का था, तो वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे प्रत्येक दृश्य की भी जांच क्यों न कराई जाए? और यदि वीडियो में दिखाई दे रहा घटनाक्रम वास्तविक है, तो फिर प्रेस नोट में उसका पूरा और स्पष्ट विवरण क्यों नहीं है?

नौ महीने से बेटे के न्याय की लड़ाई लड़ रहा परिवार
कोरीखेड़ा गांव निवासी 10 वर्षीय आशुतोष की हत्या के मामले को करीब नौ महीने बीत चुके हैं। परिवार का कहना है कि वह लगातार पुलिस और प्रशासन से न्याय की मांग कर रहा है। आरोपियों की गिरफ्तारी और घटना के खुलासे की मांग को लेकर परिवार कई बार अपनी आवाज उठा चुका है। मुख्यमंत्री के जिले में आने की जानकारी के बाद परिवार को उम्मीद थी कि शायद इस बार उसकी फरियाद सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंच सकेगी। लेकिन इसी दौरान पुलिस कार्रवाई का वीडियो सामने आने के बाद मामला हत्या की जांच से आगे बढ़कर पुलिस की कार्यशैली और कथित कार्रवाई पर भी सवाल खड़े करने लगा है।

मृतक की बहन ने भी लगाए गंभीर आरोप
मृतक की बहन अंशिका गुप्ता ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर पुलिस पर परिवार के साथ मारपीट, अभद्रता और आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल के आरोप लगाए हैं। परिवार का दावा है कि न्याय की मांग करने पर उनके साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह बेहद पीड़ादायक है। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष किसी स्वतंत्र जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।

सवाल प्रेस नोट पर नहीं, वायरल वीडियो की जांच पर है।
पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कौन करेगा? अगर वीडियो में दिखाई दे रहे दृश्य वास्तविक घटना का हिस्सा हैं तो उनकी परिस्थितियां क्या थीं? पुलिस वहां क्यों पहुंची? किसके निर्देश पर कार्रवाई हुई? महिलाओं के साथ धक्का-मुक्की और युवक के साथ मारपीट जैसे दिखाई दे रहे दृश्यों की वास्तविकता क्या है? क्या मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों के बॉडी कैमरा, मोबाइल वीडियो या अन्य रिकॉर्डिंग उपलब्ध हैं? इन सभी सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकता है।
वहीं दूसरी ओर यदि वायरल वीडियो अधूरा है अथवा घटनाक्रम को संदर्भ से अलग करके प्रस्तुत किया गया है तो इसकी भी आधिकारिक जांच होनी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति जनता के सामने आ सके।

महिला सम्मान के दावों के बीच महिला पुलिस पर भी सवाल
प्रदेश सरकार लगातार महिला सुरक्षा और महिला सम्मान को लेकर अभियान चला रही है। ऐसे में यदि किसी मामले में महिलाओं के साथ पुलिस व्यवहार पर गंभीर आरोप सामने आते हैं, तो उसकी निष्पक्ष जांच और भी जरूरी हो जाती है।
फर्रुखाबाद में इस मामले की एक खास बात यह भी है कि जिले की पुलिस व्यवस्था में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां महिलाओं के पास हैं। ऐसे में यदि मातृशक्ति के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोप लगते हैं तो मामला और संवेदनशील हो जाता है। हालांकि किसी भी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी को दोषी ठहराने से पहले निष्पक्ष जांच जरूरी है। अब जरूरत इस बात की है कि पुलिस के प्रेस नोट और वायरल वीडियो दोनों को सामने रखकर पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जाए। क्योंकि सवाल किसी एक पक्ष को सही या गलत साबित करने का नहीं बल्कि उस परिवार को न्याय दिलाने का है जो करीब नौ महीने से अपने 10 वर्षीय बेटे की हत्या के मामले में न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है।

आखिर सच क्या है- वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा घटनाक्रम, पुलिस का प्रेस नोट या फिर दोनों के बीच छिपी कोई तीसरी तस्वीर? इसका जवाब निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है।

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