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विश्व आदिवासी दिवस पर उमड़ा जनसैलाब, झापपारा में संस्कृति और परंपरा का दिखा अद्भुत संगम

पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे हजारों आदिवासी समाज के लोग, नृत्य-संगीत की थाप पर झूमा पूरा नगर

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Tuesday, August 11, 2026

पुलकित दास महंत प्रदेश स्टेट प्रभारी छत्तीसगढ़ दैनिक अयोध्या टाइम्स समाचार पत्र

घरघोड़ा। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर घरघोड़ा नगर के आदिवासी बहुल वार्ड झापपारा में 9 अगस्त को उत्साह, उमंग और गौरव का ऐसा रंग देखने को मिला, जिसने पूरे क्षेत्र को आदिवासी संस्कृति की जीवंत तस्वीर में बदल दिया। कार्यक्रम में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए और अपनी समृद्ध संस्कृति, परंपरा एवं लोककला का भव्य प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम स्थल पर सुबह से ही लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। पारंपरिक परिधानों में सजे महिला-पुरुष और युवा आकर्षण का केंद्र रहे। जैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ा, पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज और लोकगीतों की मधुर धुनों ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया।

नृत्य और लोकगीतों ने बांधा समां

मंच पर कलाकारों ने सुवा सहित विभिन्न स्थानीय पारंपरिक नृत्यों और लोकगीतों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर कलाकारों के कदम थिरके तो उपस्थित जनसमुदाय भी उत्साह से झूम उठा। कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समाज की प्राचीन कला, संस्कृति और परंपराओं की अद्भुत झलक देखने को मिली।

जल, जंगल और जमीन की रक्षा ही हमारी पहचान

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ताओं ने कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा करना आदिवासी समाज की पहचान और उसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। वक्ताओं ने कहा कि आधुनिकता के दौर में अपनी जड़ों, बोली-भाषा, लोककला और पारंपरिक संस्कृति को बचाए रखना बेहद जरूरी है।

उन्होंने समाज के युवाओं और नई पीढ़ी से अपनी गौरवशाली परंपराओं को जानने और उन्हें आगे बढ़ाने का आह्वान किया। साथ ही आदिवासी संस्कृति, भाषा, कला और लोक परंपराओं को भावी पीढ़ी तक सुरक्षित पहुंचाने का संकल्प भी लिया गया।

युवा टीम ने संभाली आयोजन की कमान

कार्यक्रम को सफल बनाने में नगर पंचायत पार्षद तिलेश्वर पैंकरा ने अपनी युवा टीम के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आयोजन को लेकर युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं से लेकर लोगों की सहभागिता तक, पूरी टीम सक्रिय नजर आई।

विश्व आदिवासी दिवस का यह आयोजन केवल एक उत्सव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अपनी संस्कृति, परंपरा और पहचान पर गर्व करने तथा उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संदेश भी दे गया। झापपारा में उमड़ा जनसैलाब इस बात का गवाह बना कि आदिवासी समाज आज भी अपनी जड़ों, संस्कृति और परंपराओं से मजबूती से जुड़ा हुआ है।

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