आशीष कश्यप, लखनऊ
दैनिक अयोध्या टाइम्स
उत्तर प्रदेश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तमाम दावों के बावजूद राजधानी के लखनऊ पश्चिम जोन में अपराध का ग्राफ थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में पुलिस के आधिकारिक डेटाबेस से प्राप्त जून महीने 1 जून से 30 जून के आंकड़ों ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। इन आंकड़ों के अनुसार, क्षेत्र में आपराधिक घटनाओं का सिलसिला लगातार जारी है, जो प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
आंकड़ों के आईने में जमीनी हकीकत
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज ये आंकड़े महज एक बानगी हैं। वास्तविक स्थिति इससे कहीं अधिक भयावह हो सकती है, क्योंकि कई मामले ऐसे हैं जो संज्ञान में आने के बावजूद विभिन्न कारणों से आधिकारिक फाइलों का हिस्सा नहीं बन पाते। लगातार बढ़ रही मुकदमों की संख्या इस बात की तस्दीक करती है कि जमीनी स्तर पर पुलिसिंग और सुरक्षा के दावों में भारी अंतर है।
सुरक्षा व्यवस्था को तत्काल सुदृढ़ करने की आवश्यकता
बढ़ते अपराधों पर लगाम लगाने के लिए अब प्रशासनिक अधिकारियों को ठोस और कड़े कदम उठाने की दरकार है। नागरिकों में व्याप्त डर को खत्म करने और सरकार की मंशा को धरातल पर उतारने के लिए पुलिस को अपनी रणनीति में बदलाव करना होगा। यदि जल्द ही प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो लखनऊ पश्चिम में कानून-व्यवस्था की स्थिति और अधिक बिगड़ सकती है।






