वरदान संवाददाता
रामपुर मनिहारान थाना क्षेत्र के ग्राम बुड्ढा खेड़ा संतलाल का प्राथमिक विद्यालय बदहाली और लापरवाही की खुली तस्वीर पेश कर रहा है। विद्यालय की दीवारें इतनी जर्जर हो चुकी हैं कि कभी भी गिर सकती हैं। बरसात के मौसम में यह खतरा और भी बढ़ गया है, जहां मासूम बच्चे मौत की दीवारों के बीच बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ समय पहले भी ऐसी ही दर्दनाक घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
राजस्थान के झालावाड़ में विद्यालय की छत गिरने से मासूम बच्चों की मौत हो गई थी, लेकिन उसके बाद भी जिम्मेदार तंत्र सबक लेने को तैयार नहीं दिख रहा। क्या प्रशासन बच्चों की लाशें देखकर ही नींद से जागेगा? लाखों रुपये खर्च कर सरकार ने ग्राम मै विकलांग शौचालय का निर्माण कराया, लेकिन चंद महीनों में ही वहां भी दीवारों मै दरारें नजर आने लगी। यह हाल सरकारी कार्यप्रणाली की पोल खोल रहा है और शिक्षा विभाग की गंभीर लापरवाही को उजागर करता है।
सवाल उठता है कि आखिर सरकारी निर्माणों में किस स्तर पर भ्रष्टाचार हो रहा है, जिससे करोड़ों की योजनाएं कुछ ही महीनों में जर्जर हो जाती हैं। जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि श्रीकांत कोरी भी विद्यालय का निरीक्षण कर समस्या से उच्चाधिकारियों को अवगत करा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। सूत्रों का कहना है कि विद्यालय की दीवारों में गहरी दरारें साफ नजर आती हैं, जिनके सहारे मासूमों की जिंदगी टिकी हुई है।
यह खतरा किसी भी पल बड़े हादसे में बदल सकता है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत और सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए तो स्थिति भयावह हो सकती है। सवाल यह है कि क्या शिक्षा विभाग और प्रशासन राजस्थान जैसी त्रासदी दोबारा होने का इंतजार कर रहा है? आखिर मासूमों की जान कब तक लापरवाही की भेंट चढ़ती रहेगी?






