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मृत्यु भोज को किया समाप्त, समाज सुधार की अनूठी मिसाल बना ग्राम पाल्ली

सहारनपुर। सहारनपुर जनपद की देहात विधानसभा के ग्राम पाल्ली, निकट हरौडा में एक ऐसा सामाजिक कार्यक्रम देखने को मिला, जिसने वर्षों से चली आ रही परंपराओं को नई दिशा दे दी। यहां एक परिवार ने अपनी माता के निधन के उपरांत मृत्यु भोज का आयोजन न कर,

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Sunday, September 7, 2025

सहारनपुर। सहारनपुर जनपद की देहात विधानसभा के ग्राम पाल्ली, निकट हरौडा में एक ऐसा सामाजिक कार्यक्रम देखने को मिला, जिसने वर्षों से चली आ रही परंपराओं को नई दिशा दे दी। यहां एक परिवार ने अपनी माता के निधन के उपरांत मृत्यु भोज का आयोजन न कर, समाज में एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक पहल की।

इस मौके पर सामाजिक संस्था भारतीय शिक्षा चैरिटेबल ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयराम गौतम प्रधान ने मृत्यु भोज को बंद करने के लिए उपस्थित लोगों से अपील करते हुए कहा कि समाज में मृत्यु भोज जैसे आयोजन आर्थिक और मानसिक रूप से पीड़ित परिवार पर अतिरिक्त बोझ डालते हैं। अब समय आ गया है कि हम इन परंपराओं से बाहर निकलें और समाज के उत्थान के लिए सोचें।

बुधवार को देहात विधानसभा के ब्लाक पुवारंका के गांव पाल्ली, हरौडा़ में आयोजित शोकसभा में समाजिक संस्था भारतीय शिक्षा चेरिटेबल ट्रस्ट के ट्रस्टी जयराम गौतम प्रधान ने कहा कि मृत्यु भोज जैसी सामाजिक कुरीतियों पर रोक लगाने की जो मुहिम अब तक सिर्फ भाषणों और नारों तक सीमित थी, उसे आज ग्राम पाल्ली के एक परिवार ने जमीन पर उतार कर मिसाल कायम कर दी। स्व. स्लेलता, पत्नी स्व. मामचंद के निधन के उपरांत उनके पुत्र गोपी, करण, सुमित और पुत्री ने मिलकर यह ऐलान किया कि वे किसी भी प्रकार का मृत्यु भोज नहीं करेंगे।

उन्होंने इस अवसर पर ग्रामवासियों को शपथ दिलाई कि आज के बाद कोई भी व्यक्ति मृत्यु भोज का आयोजन नहीं करेगा और न ही किसी अन्य को इसकी अनुमति देगा। इस प्रस्ताव पर उपस्थित सभी ग्रामवासियों ने एकमत होकर अपनी सहमति दी। समाज सुधार की इस पहल को समर्थन मिला। गौरतलब है कि जयराम गौतम प्रधान केवल बातों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में ट्रस्ट द्वारा अब तक 150 से अधिक नि:शुल्क पाठशालाएं चलाई जा रही हैं, जिनमें ग्रामीण बच्चों को शिक्षित किया जा रहा है।

साथ ही हाल ही में 11 निर्धन कन्याओं का सामूहिक विवाह भी ट्रस्ट के माध्यम से कराया गया है। उन्होंने सहारनपुर जिले में 111 संत रविदास मूर्ति कलश भेंट कर सामाजिक समरसता की एक और मिसाल पेश की है। मृत्यु भोज त्याग की इस पहल में ग्राम के कई जिम्मेदार लोग जैसे सुलेखचंद, जगपाल, प्रकाश, सरोज, संजय, अरविंद, सुनील, परवीन, सुनील चांद, विशाल आदि भी सम्मिलित रहे, जिन्होंने परिवार के इस निर्णय का भरपूर समर्थन किया।

इस दौरान शोकसभा कार्यक्रम में ट्रस्ट के जिला अध्यक्ष एडवोकेट विपिन बर्मन, जिला मंत्री दिनेश बालियान, भाई मिंटू चौधरी, अभिषेक, सावन बाबरे और शुभम मेहरा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। वही यह निर्णय केवल एक परंपरा को छोड़ने का नहीं, बल्कि समाज में एक नई सोच को जन्म देने का प्रयास है। ग्राम पाल्ली अरोड़ा से उठी यह चेतना अब आसपास के गांवों में भी जागरूकता फैलाने लगी है।

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