पूरनपुर (पीलीभीत)। विकासखंड पूरनपुर की ग्राम पंचायत दौलतपुर, ता. चांदपुर में निर्माणाधीन सीएससी सेंटर सह पंचायत भवन का लिंटर शुक्रवार, 14 अगस्त को निर्माण के दौरान अचानक भरभराकर गिर गया। लिंटर गिरने से निर्माणाधीन भवन की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। घटना के दौरान कुछ श्रमिकों को मामूली चोटें आने की भी जानकारी सामने आई है।ग्रामीणों के अनुसार पंचायत भवन परिसर में सीएससी सेंटर सह पंचायत भवन का निर्माण कराया जा रहा था। शुक्रवार को लिंटर डालने का कार्य चल रहा था और करीब 50 प्रतिशत काम पूरा हो चुका था। इसी दौरान अचानक लिंटर की संरचना धराशायी हो गई।
लिंटर गिरने से नवनिर्मित दीवारों में भी दरारें आने और कुछ हिस्सों के क्षतिग्रस्त होने की बात कही जा रही है।निर्माण की गुणवत्ता पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
घटना के बाद ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि निर्माण में मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। ग्रामीणों का दावा है कि निर्माण में घटिया गुणवत्ता की ईंट, मसाले में सीमेंट की कम मात्रा तथा सरिया के इस्तेमाल में भी मानकों की अनदेखी की गई। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि लिंटर डालने से पहले शटरिंग, लेवल और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं की पर्याप्त जांच नहीं की गई। निर्माण स्थल पर संबंधित तकनीकी कर्मचारियों की मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। श्रमिकों द्वारा सुरक्षा उपकरणों के बिना काम किए जाने का आरोप भी ग्रामीणों ने लगाया है।ग्राम पंचायत अधिकारी पर भी उठे सवाल ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत अधिकारी अखिलेश गुप्ता की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि भवन का निर्माण शुरू होने के बाद से ग्राम पंचायत अधिकारी ने निर्माण स्थल का नियमित निरीक्षण नहीं किया। ग्रामीणों का कहना है कि जिस दिन लिंटर डाला जा रहा था, उस दिन भी अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं थे।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यदि निर्माण कार्य की समय-समय पर तकनीकी और विभागीय निगरानी की जाती तो संभवतः इस तरह की घटना को रोका जा सकता था। हालांकि संबंधित ग्राम पंचायत अधिकारी अथवा अन्य जिम्मेदार अधिकारियों का पक्ष खबर लिखे जाने तक सामने नहीं आ सका।
लाखों की लागत से हो रहा निर्माण
ग्रामीणों के अनुसार भवन का निर्माण सरकारी धनराशि से कराया जा रहा है। ऐसे में निर्माणाधीन भवन का लिंटर गिरने की घटना सरकारी धन के इस्तेमाल और निर्माण की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच की जरूरत को और गंभीर बनाती है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब निर्माण के दौरान ही लिंटर गिर गया तो भविष्य में भवन की मजबूती और सुरक्षा की क्या गारंटी होगी।
तीन सदस्यीय समिति से जांच की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों में रोष है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी पीलीभीत से मामले की तत्काल जांच कराने की मांग की है। उन्होंने निर्माण कार्य को फिलहाल रोककर भवन की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराने तथा किसी स्वतंत्र अथवा थर्ड पार्टी तकनीकी संस्था से निर्माण सामग्री और संरचना की जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों ने कहा कि जांच में यदि निर्माण में अनियमितता, मानकों की अनदेखी या सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो संबंधित ग्राम पंचायत अधिकारी, ग्राम प्रधान, निर्माण एजेंसी/ठेकेदार और जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों की भूमिका तय कर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही घटना में घायल हुए श्रमिकों को उचित उपचार और नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है। अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन की जांच पर टिकी हैं। यदि जांच निष्पक्ष और तकनीकी तरीके से होती है तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि लिंटर गिरने के पीछे निर्माण की गुणवत्ता, तकनीकी खामी, शटरिंग की कमजोरी या अन्य कोई कारण जिम्मेदार था।





