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राज्य आयुक्त ने कोर्ट में 62 दिव्यांग जनों की सुनवाई करते हुए आदेश किए

EDITED BY: DAT ब्यूरो चीफ

UPDATED: Saturday, November 22, 2025

पीलीभीत । राज्य आयुक्त दिव्यांगजन प्रो0 हिमांशु शेखर झा, उपायुक्त  शैलेन्द्र सोनकर जी द्वारा दिव्यांगजनों की समस्याओं को मौके पर जाकर त्वरित समाधान करने में क्रम में जनपद पीलीभीत के गाॅधी सभागार में मोबाईल कोर्ट का आयोजन किया गया।

मोबाईल कोर्ट में विधि अधिकारी उत्कर्ष द्विवेदी व अन्य सहायेगी स्टाॅफ उपस्थित रहें। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी, सिटी मजिस्ट्रेट, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, क्षेत्राधिकारी सिटी, जिला विकास अधिकारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, जिला पूर्ति अधिकारी, जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी, जिला सूचना अधिकारी व अन्य विभागीय अधिकरियों के साथ आदर्श जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र से सुखबीर सिंह भदौरिया, अभिषेक आनन्द, जगन्नाथ चक्रवर्ती, ओमदेव पाठक, रामनरेश, तहजीब, संजीव सागर व अन्य सहयोगी स्टाफ उपस्थित रहा। 

मोबाईल कोर्ट हेतु दिव्यांगजनों के पंजीकरण के लिए दो सेट कम्प्यूटर प्रिंटर आदि लगाते हुए शिकायतों के पंजीकरण व कोर्ट में आदेश निर्गत करने हेतु आवश्यक व्यवस्था की गई। मोबाईल कोर्ट में जनपद के कोने -कोन से दिव्यांगजन अपनी शिकायतों के निस्तारण हेतु पहॅुचे। कोर्ट में राशन कार्ड न होने, दिव्यांगता का प्रतिशत कम दिखाने, पेंशन न प्राप्त होने, आवास न मिलने, मोटराईज्ड ट्राइसाईकिल आदि के सम्बन्ध में शिकायत की गई। कोर्ट ने पात्रता आदि का निरीक्षण/परीक्षण करते हुए यथासम्भव आदेश पारित किये जिसकी एक प्रति दिव्यांगजन व एक प्रति संबंधित अधिकारी को प्रदान करते हुए समस्या के निस्तारण के आदेश निर्गत किए गए। 

राज्य आयुक्त दिव्यांगजन द्वारा मुख्य चिकित्सा अधिकारी पीलीभीत को विशेष रूप से निर्देशित किया कि दिव्यांगता में प्रतिशत के निर्धारण में यदि मेडिकल बोर्ड द्वारा कोई मनमानी की जा रही है तो संबंधित को निर्देशित करना सुनिश्चित करें। कुछ दिव्यांगजनो का दिव्यांगता प्रतिशत कम प्रतीत होने पर उनका पुनः परीक्षण करने हेतु आदेशित किया। सूचित हो कि 80 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता होने पर ही मोटराईज्ड ट्राइसाईकिल प्रदान की जाती है। 

वास की माॅग करने वाले संदर्भ मुख्य विकास अधिकारी व जिला विकास अधिकारी को तथा राशन कार्ड बनवाने वालो की माॅगो को जिला पूर्ति अधिकारी को संदर्भित किया गया। कोर्ट द्वारा औचित्यपूर्ण व पात्रता की शर्तो को पूरा करने की स्थिति में ही निस्तारण के आदेश निर्गत किए गए व कुछ माॅगे/शिकायत औचित्यपूर्ण न होने के कारण खारिज कर दी गई। कोर्ट में कुल 62 दिव्यांगजनों की सुनवाई करते हुए आदेश निर्गत किए गये।

राज्य आयुक्त  निर्देशित किया गया कि विकास भवन में नीचे का एक कक्ष दिव्यांगजनों के बैठने हेतु आरक्षित किया जाए ताकि दिव्यांगजन शिकायत से संबंधित अधिकारी उक्त कक्ष में पहुंचकर उनकी समस्या का समाधान कर सकें। उन्होंने कहा कि अधिकारियों के बैठने का समय निर्धारित करते हुए कार्यालय के बाहर अंकित किया जाए। सीढ़ियों के किनारे रेलिंग लगाई जाए और संकेत भाषा के जानकार की नियुक्ति की जाए।अंत में जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी सुरेश कुमार मौर्य द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया।
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