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Iran War फिर शुरू होने की संभावना के बीच Modi से मिले Marco Rubio, PM को दिया Trump का खास संदेश

प्रधानमंत्री मोदी और मार्को रुबियो की इस मुलाकात को बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन के बीच भारत अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के नए चरण के रूप में देखा जा रहा है।

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Sunday, May 24, 2026

ईरान के खिलाफ अमेरिकी युद्ध दोबारा शुरू होने की बढ़ती संभावना के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर कई अहम क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विस्तृत बातचीत की। चार दिवसीय भारत दौरे पर आए रुबियो ने प्रधानमंत्री मोदी को रक्षा, रणनीतिक प्रौद्योगिकी, व्यापार और निवेश, ऊर्जा सुरक्षा, संपर्क व्यवस्था, शिक्षा तथा जनसंपर्क जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारत अमेरिका सहयोग की निरंतर प्रगति की जानकारी भी दी। उन्होंने पश्चिम एशिया सहित विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर अमेरिका का दृष्टिकोण भी साझा किया। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ओर से शांति प्रयासों के प्रति अपना समर्थन दोहराते हुए कहा कि सभी संघर्षों का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए। साथ ही उन्होंने रुबियो से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तक अपनी शुभकामनाएं पहुंचाने का अनुरोध भी किया। इस दौरान रुबियो ने प्रधानमंत्री मोदी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण भी दिया।देखा जाये तो प्रधानमंत्री मोदी और मार्को रुबियो की इस मुलाकात को बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन के बीच भारत अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के नए चरण के रूप में देखा जा रहा है। बैठक में रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी और हिंद प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा जैसे विषयों पर विशेष जोर दिया गया। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि दोनों देशों के बीच सुरक्षा, व्यापार और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने पर सार्थक चर्चा हुई तथा भारत अमेरिका के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साझेदार है। उन्होंने कहा कि दोनों देश मुक्त और खुले हिंद प्रशांत क्षेत्र की अवधारणा को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।

रुबियो की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब चीन की बढ़ती आक्रामकता, हिंद प्रशांत क्षेत्र में सामरिक प्रतिस्पर्धा और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक राजनीति को नई दिशा दे दी है। ऐसे परिदृश्य में भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती निकटता को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और उभरती प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में तेजी से विस्तार हो रहा है, जिससे एशिया प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

भारत पहुंचने से पहले मार्को रुबियो ने स्पष्ट संकेत दिया था कि अमेरिका भारत के साथ ऊर्जा सहयोग को व्यापक बनाना चाहता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत को उतनी ऊर्जा उपलब्ध कराने के लिए तैयार है, जितनी भारत खरीदना चाहे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब फारस की खाड़ी क्षेत्र में तनाव और होरमुज जलडमरूमध्य से जुड़ी अनिश्चितताओं ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों में शामिल है और पश्चिम एशिया में किसी भी अस्थिरता का सीधा प्रभाव उसकी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। ऐसे में अमेरिका के साथ ऊर्जा सहयोग भारत के लिए रणनीतिक सुरक्षा कवच का कार्य कर सकता है।

रुबियो ने भारत को अमेरिका का महान साझेदार और विश्वसनीय सहयोगी बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच अनेक महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत यात्रा के दौरान क्वॉड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। गौरतलब है कि क्वॉड में भारत, अमेरिका, जापान और आस्ट्रेलिया शामिल हैं और इसका मुख्य उद्देश्य हिंद प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, समुद्री सुरक्षा तथा नियम आधारित व्यवस्था को मजबूत करना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि क्वॉड अब एशिया प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन का महत्वपूर्ण साधन बन चुका है। चीन की समुद्री विस्तारवादी नीतियों और सैन्य सक्रियता के बीच क्वाड देशों का सहयोग सामरिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत के लिए भी यह मंच इसलिए अहम है क्योंकि इससे उसे तकनीकी सहयोग, समुद्री निगरानी, रक्षा साझेदारी और आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में लाभ मिल रहा है।

हम आपको बता दें कि रुबियो ने अपने दौरे की शुरुआत कोलकाता से की, जहां उन्होंने मदर टेरेसा मिशनरीज आफ चैरिटी के मुख्यालय मदर हाउस का दौरा किया। उन्होंने निर्मला शिशु भवन और विक्टोरिया मेमोरियल भी देखा। इस यात्रा को मानवीय और सांस्कृतिक संदेश देने वाला कदम माना जा रहा है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ उनकी पत्नी जेनेट रुबियो और राजदूत सर्जियो गोर भी इस दौरान मौजूद रहे। गोर ने कहा कि भारत अमेरिका संबंध केवल रणनीतिक हितों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के साझा मूल्यों और निस्वार्थ सेवा की भावना पर भी आधारित हैं।

रुबियो की यात्रा का एक महत्वपूर्ण सामरिक पहलू पश्चिम एशिया और ईरान से जुड़ा हुआ है। यात्रा से पहले उन्होंने नाटो देशों की आलोचना करते हुए कहा था कि ईरान वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा है और उसे परमाणु हथियार नहीं मिलने चाहिए। यह बयान इस बात का संकेत है कि अमेरिका पश्चिम एशिया में अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है और इस संदर्भ में भारत जैसे प्रभावशाली साझेदार का सहयोग उसके लिए महत्वपूर्ण है। दूसरी ओर भारत ने संतुलित रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि वह सभी विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और कूटनीतिक संवाद का समर्थन करता है।

कुल मिलाकर, मार्को रुबियो की भारत यात्रा भारत अमेरिका संबंधों के नए अध्याय का संकेत देती है। रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, प्रौद्योगिकी और हिंद प्रशांत सुरक्षा के क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग न केवल दोनों देशों के हितों को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक रणनीतिक संतुलन पर भी गहरा प्रभाव डालेगा। यह यात्रा स्पष्ट करती है कि बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में भारत और अमेरिका एक दूसरे को दीर्घकालिक और भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रहे हैं।

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