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गुमशुदगी दर्ज होने के बावजूद पुलिस सोती रही, अस्पतालों में तड़पकर दम तोड़ा

गुमशुदगी के बावजूद नहीं हुई समय पर पहचान, अस्पतालों में इलाज के दौरान मौत; परिजनों ने पुलिस की लापरवाही और अपहरण के बाद हत्या का लगाया आरोप

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Saturday, July 11, 2026

दैनिक अयोध्या टाईम्स
दयानन्द कुमार

हापुड़। नगर कोतवाली क्षेत्र की पुलिस की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। केशव नगर निवासी मोहित की रहस्यमय मौत के बाद परिजनों ने पुलिस पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।

परिजनों के अनुसार मोहित 8 जुलाई की शाम करीब 5:30 बजे रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गया था। उसी दिन नगर कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज कराई गई और पुलिस से लगातार उसे खोजने की गुहार लगाई जाती रही।

आरोप है कि पुलिस की सुस्त पड़ताल के बीच मोहित 3 दिन तक अस्पतालों की चौखट पर जिंदगी और मौत से जूझता रहा, लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। 10 जुलाई को मोहित की स्कूटी सरस्वती मेडिकल कॉलेज परिसर में खड़ी मिली। वहां पता चला कि एक अज्ञात गंभीर घायल को भर्ती कराया गया था, जिसे रामा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। रामा से उसे जिला अस्पताल दस्तोई रोड और फिर वहां से मेरठ मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया।

देर रात परिजन मेरठ मेडिकल पहुंचे। काफी मशक्कत के बाद मोहित को दिल्ली रेफर कराया गया, लेकिन उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया।

सबसे बड़ा सवाल
गुमशुदगी पहले से दर्ज होने के बावजूद पुलिस अज्ञात घायल की पहचान क्यों नहीं कर सकी? अगर समय रहते सक्रियता दिखाई होती तो शायद मोहित की जान बच जाती। यही सवाल अब परिजन और शहरवासी उठा रहे हैं।

मामला और संदिग्ध इसलिए भी है क्योंकि मोहित के सिर पर गंभीर चोट है, जबकि शरीर पर कहीं और चोट या खरोंच का निशान नहीं है। स्कूटी भी सरस्वती मेडिकल कॉलेज में सही-सलामत मिली। ऐसे में हादसा, हमला या साजिश हर एंगल पर सवाल खड़े हो गए हैं।

परिजनों ने मोहित के अपहरण कर हत्या किए जाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पुलिस ने तत्परता दिखाई होती तो आज मोहित जिंदा होता।

फिलहाल नगर कोतवाली पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही मौत के कारणों का खुलासा हो सकेगा

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