इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार (1 मई, 2026) को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर की मांग वाली याचिका खारिज कर दी. याचिका में उनके ‘इंडियन स्टेट से लड़ाई’ संबंधी बयान पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की गई थी.हिंदू शक्ति दल की सिमरन गुप्ता ने यह याचिका दाखिल की थी, जिसमें कहा गया था कि राहुल गांधी का बयान देशभर की जनभावनाओं को आहत करने वाला है और यह राष्ट्रविरोधी और देशद्रोह जैसी टिप्पणी है. जस्टिस विक्रम डी. चौहान की सिंगल बेंच ने उनकी यह याचिका खारिज कर दी है.मामला राहुल गांधी के उस बयान से जुड़ा है, जो उन्होंने पिछले साल जनवरी में नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के नए मुख्यालय के उद्घाटन के दौरान दिया था. राहुल गांधी ने कहा था, ‘हम अब भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भारतीय राज्य से भी लड़ रहे हैं.’याचिकाकर्ता का आरोप था कि यह सिर्फ राजनीतिक आलोचना नहीं, बल्कि देश को अस्थिर करने और भारतीय राज्य को विरोधी ताकत के रूप में पेश करने की कोशिश है. इससे पहले संभल की स्थानीय अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली अर्जी खारिज कर दी थी. इसके बाद दाखिल पुनरीक्षण याचिका भी खारिज हो गई थी, जिसके बाद मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा.राहुल गांधी ने अपने भाषण में बीजेपी और आरएसएस पर देश की संस्थाओं पर कब्जा करने का आरोप लगाया था. उन्होंने कहा था कि कांग्रेस संविधान और भारत की मूल भावना की रक्षा की लड़ाई लड़ रही है. राहुल गांधी के इस बयान पर उस समय राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था. भाजपा नेताओं ने उन पर भारत की संप्रभुता और संवैधानिक ढांचे को कमजोर करने का आरोप लगाया था.पूर्व भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने कहा था कि राहुल गांधी का बयान कांग्रेस की असली सोच को उजागर करता है और यह राष्ट्र के खिलाफ वैचारिक लड़ाई को दर्शाता है. इससे पहले असम के गुवाहाटी के पान बाजार थाने में भी राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 और 197(1)(डी) के तहत मामला दर्ज किया गया था. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उनके बयान से देश में असंतोष पैदा करने और राष्ट्रीय एकता के खिलाफ खतरा पैदा करने की कोशिश की गई.





