” सोमेंद्र पटेल, महराजगंज रायबरेली । सावन जहाँ शिव साधना के लिए प्रसिद्ध है उसी परिपेक्ष्य में क्षेत्र के अमांवा स्थित झारखण्ड़ेश्वर धाम में भक्ति की बह रही है गंगा लोग कर रहे हैं देवों के देव महादेव का गुणगान यह स्थान ÷
झारखण्ड़ेश्वर महादेव मंदिर एन एच 330A पर रायबरेली मुख्यालय से 15 किलोमीटर अयोध्या मार्ग पर स्थित अमांवा कस्बे से दाहिनी ओर 500 मीटर मौजूद है।
इतिहास ÷
लिंग स्थापना का काल खंड अज्ञात है कुछ लोग इसे त्रेतायुग से भी जोड़ते हैं किन्तु मंदिर में पंद्रहवीं तथा सोलहवीं शताब्दी में हुए आतताई आक्रमणकारियों के द्वारा छोड़े गए साक्ष्य आज भी उपलब्ध हैं।चूँकि यह तालुकेदारी का केंद्र रहा है यहाँ के कन्हपुरिया तालुकेदारों जो कि तिलोई राजवंश से ताल्लुक रखते थे,यह मंदिर उनकी पूजा का केंद्र रहा है मंदिर की वास्तुकला भी इसी तरफ इशारा करती है अट्ठारहवीं शताब्दी के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बैसवारे के वीर सपूत रायबरेली के गौरव राणाबेनी माधव बक्श सिंह ने आश्रय के दौरान इस मंदिर का पुनर्निर्माण कराया था अतः यह स्थान ऐतिहासिक महत्व का भी है।
विशेषताएँ ÷
मंदिर में क्षेत्रीय भक्तों के साथ सुदूर क्षेत्रों से भी कांवड़ यात्रा कर लोग दर्शन के साथ-साथ अपने अनुष्ठान एवं विभिन्न संस्कारों के लिए मंदिर परिसर में आते रहते हैं सावन के सोमवारों के अलावा पूरे वर्ष हर पूर्णिमा पर भंडारे का प्रबंध रहता है परिसर में स्थित भगवान शिव की विशाल प्रतिमा दर्शनीय है।ऐसी मान्यता है कि मंदिर पर झूठी नहीं खाई जा सकती, अपराधी भोलेनाथ के द्वारा दंडित होता है मान्यता पूरी होने का आलम यह है कि मंदिर प्रांगण में चढ़ाएं अनगिनत घंटे जिनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है वह आज भी नांदकर धर्मजागरण का कार्य कर रहे हैं।





