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एम्स में सर्जिकल कौशल को बेहतर बनाने के लिए लाइव लैप्रोस्कोपिक सर्जरी कार्यशाला का हुआ आयोजन

कार्यशाला का उद्देश्य पीजी छात्रों और स्त्री रोग विशेषज्ञों को कम चीर फाड़ वाली स्त्री रोग संबंधी सर्जरी में प्रैक्टिकल अनुभव और उन्नत ट्रेनिंग देना

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Sunday, July 26, 2026

रायबरेली ब्यूरो।। एम्स रायबरेली के प्रसूति और स्त्री रोग विभाग ने ‘फेडरेशन ऑफ ऑब्सटेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया’ (FOGSI) और ‘इंडियन एसोसिएशन ऑफ गायनेकोलॉजिकल एंडोस्कोपिस्ट्स’ (IAGE) के सहयोग से एक लाइव लैप्रोस्कोपिक सर्जरी कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया। EAGLE (एवरी एस्पायरिंग गायनेकोलॉजिस्ट लर्न एंडोस्कोपी) नाम की इस कार्यशाला का उद्देश्य पोस्टग्रेजुएट छात्रों और प्रैक्टिस करने वाले स्त्री रोग विशेषज्ञों को कम से कम चीर-फाड़ वाली स्त्री-रोग संबंधी सर्जरी में प्रैक्टिकल अनुभव और उन्नत ट्रेनिंग देना था।


कार्यशाला का उद्घाटन कार्यकारी निदेशक प्रो. (डॉ.) अमिता जैन ने किया। उन्होंने आधुनिक स्त्री रोग चिकित्सा में लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के बढ़ते महत्व पर ज़ोर दिया। प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि कम चीर-फाड़ वाली सर्जरी, कई रोग समस्याओं के इलाज का स्टैंडर्ड तरीका बन गई है, क्योंकि इसके कई फायदे हैं – जैसे छोटे चीरे, ऑपरेशन के बाद कम दर्द, तेज़ी से रिकवरी और अस्पताल में कम समय तक रहना। उन्होंने रेजिडेंट डॉक्टरों और प्रतिनिधियों को इस मौके का पूरा फायदा उठाने और विशेषज्ञों द्वारा दिखाए गए प्रैक्टिकल टिप्स और सर्जिकल तकनीकों को सीखने के लिए प्रोत्साहित किया।
लाइव ऑपरेशन सेशन का संचालन लखनऊ के जाने-माने लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. सोनू सिंह ने किया। उन्हें जटिल स्त्री रोग एंडोस्कोपिक ऑपरेशन करने में महारत हासिल है, जिसमें एंडोमेट्रियोसिस, ओवेरियन एंडोमेट्रियोमा और बड़े फाइब्रॉइड वाले गर्भाशय के लिए मायोमेक्टॉमी का लैप्रोस्कोपिक इलाज शामिल है। प्रतिभागियों को रियल टाइम में एडवांस्ड सर्जिकल तकनीकें देखने, ऑपरेशन करने वाले सर्जन से बातचीत करने और निर्णय लेने की प्रक्रिया, इंस्ट्रूमेंटेशन और ऑपरेशन के दौरान होने वाली जटिलताओं को रोकने और उनसे निपटने के तरीकों पर चर्चा करने का मौका मिला।
इस कार्यशाला का आयोजन प्रसूति और स्त्री रोग विभाग की प्रोफेसर और विभागाध्यक्षा डॉ. पारुल सिन्हा की देख-रेख में किया गया। उन्होंने बताया कि EAGLE कार्यशाला का मकसद गायनेकोलॉजिकल एंडोस्कोपी में व्यवस्थित ट्रेनिंग को बढ़ावा देना और युवा स्त्री रोग विशेषज्ञों के सर्जिकल कौशल को मज़बूत करना है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस तरह की अकादमिक पहल किताबी ज्ञान और प्रैक्टिकल अनुभव के बीच की दूरी को कम करती हैं, जिससे आखिरकार मरीज़ों की देखभाल की क्वालिटी बेहतर होती है।
उद्घाटन समारोह में अपर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नीरज श्रीवास्तव, उप-निदेशक (प्रशासन) कर्नल अखिलेश सिंह और वित्तीय सलाहकार कर्नल यू एन राय भी शामिल हुए। उन्होंने राष्ट्रीय महत्व के एकेडमिक प्रोग्राम को आयोजित करने के लिए डिपार्टमेंट की कोशिशों की तारीफ़ की और मेडिकल एजुकेशन व एडवांस्ड सर्जिकल ट्रेनिंग में बेहतरीन काम को बढ़ावा देने के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता को दोहराया।
इस कार्यशाला में लगभग 30 पोस्टग्रेजुएट रेजिडेंट्स और प्रैक्टिस करने वाले स्त्री रोग विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इंटरैक्टिव सेशन, लाइव सर्जिकल डेमोंस्ट्रेशन और एक्सपर्ट्स के साथ चर्चाओं को डेलीगेट्स ने बहुत पसंद किया और इस प्रोग्राम को सीखने का एक बेहतरीन और मूल्यवान अनुभव बताया।

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