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छत्तीसगढ़ के कोरबा से नई दिल्ली तक गूंजी जंगल बचाने की पुकार 21 दिनों की पदयात्रा बनी पर्यावरण संरक्षण की राष्ट्रीय आवाज

राजकमल यादव और चंद्रशेखर पांडे ने 30 जून को कटघोरा से शुरू की जल जंगल जमीन अधिकार पदयात्रा 20 जुलाई को दिल्ली पहुंचकर वन, वन्यजीव और आदिवासी अस्मिता की रक्षा का संदेश दिया

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Thursday, July 23, 2026

पुलकित दास महंत प्रदेश स्टेट प्रभारी छत्तीसगढ़ दैनिक अयोध्या टाइम्स समाचार पत्र

कोरबा/ नई दिल्ली छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले की धरती से निकलीं जल जंगल जमीन अधिकार पदयात्रा ने नई दिल्ली पहुंचकर पर्यावरण संरक्षण वन्यजीव सुरक्षा और आदिवासी अस्मिता की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर बुलंद कर दिया 30 जून 2026 को कटघोरा से प्रारंभ हुई यह 21 दिवसीय पदयात्रा 20 जुलाई 2026 को देश की राजधानी नई दिल्ली पहुंचकर संपन्न हुई
इस ऐतिहासिक पदयात्रा का नेतृत्व कोरबा जिले हरदीबाजार (सरईसिंगार) निवासी राजकमल यादव एवं चंद्रशेखर पांडे ने किया यह यात्रा किसी राजनीति उद्देश्य से नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के जंगलों वन्यजीवों जल स्त्रोतों आदिवासी संस्कृति के संरक्षण के संकल्प के साथ निकाली गई


यात्रा के दौरान दोनों पदयात्रियों ने अनेक गांवों कस्बों और शहरों में लोगों से संवाद कर बताया कि जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं बल्कि करोड़ों जीव जंतुओं का आश्रय आदिवासी समाज की पहचान और प्रकृति के संतुलन का आधार है उन्होंने हसदेव अरण्य बस्तर बैलाडीला और सरगुजा सहित प्रदेश के वन क्षेत्रों की सुरक्षा को भविष्य की पीढ़ियों के लिए आवश्यक बताया
21 दिनों तक चली इस पदयात्रा को विभिन्न स्थानों पर लोगों का भरपूर समर्थन मिला पर्यावरण प्रेमियों सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने यात्रा का स्वागत करते हुए जल जंगल और जमीन की रक्षा के लिए एकजुट होने का संदेश दिया पदयात्रा के संयोजकों का कहना है कि यह किसी के विरोध की नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की यात्रा है उनका मानना है कि यदि जंगल सुरक्षित रहेगें तो जल स्त्रोत वन्यजीव आदिवासी संस्कृति और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा कोरबा से नई दिल्ली तक पहुंचीं पर पदयात्रा आज छत्तीसगढ़ की जनभावना और प्रकृति संरक्षण संकल्प की राष्ट्रीय पहचान बन चुकीं है

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