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भीषण गर्मी में बिजली संकट से उबला अठसेनी, सैकड़ों ग्रामीणों ने सिंभावली बिजलीघर पर किया जोरदार धरना-प्रदर्शन

800 परिवारों पर बिजली कटौती की मार, इनवर्टर ठप, मोबाइल चार्ज करने तक के लिए भटक रहे लोग; जल्द समाधान न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Monday, July 6, 2026

दैनिक अयोध्या टाईम्स
दयानन्द कुमार हापुड़

सिंभावली। भीषण गर्मी और उमस के बीच लगातार बाधित बिजली आपूर्ति से त्रस्त गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र के गांव अठसेनी गांव के ग्रामीणों का सोमवार को गुस्सा फूट पड़ा। बिजली संकट से परेशान ग्रामीण बड़ी संख्या में सिंभावली बिजलीघर पहुंचे और ऊर्जा निगम के खिलाफ धरना-प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जाहिर की। प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए गांव में नियमित और पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की।
धरने का नेतृत्व कर रहे मास्टर रईस ने बताया कि अठसेनी गांव के करीब 800 परिवार पिछले कई दिनों से गंभीर बिजली संकट का सामना कर रहे हैं। लगातार बिजली न मिलने के कारण लोगों के इनवर्टर पूरी तरह जवाब दे चुके हैं, जबकि मोबाइल फोन चार्ज करने जैसी सामान्य जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के इस दौर में बिजली की अनुपलब्धता से ग्रामीणों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
ग्रामीणों ने बताया कि दिन और रात दोनों समय बिजली की आंख-मिचौली जारी है। बार-बार बिजली गुल होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, वहीं बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चे सबसे अधिक परेशान हैं। पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है, जिससे लोगों को अतिरिक्त समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ऊर्जा निगम के अधिकारियों को कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन समस्या के स्थायी समाधान के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। अधिकारियों की उदासीनता के कारण ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान कर दिया जाता तो उन्हें धरना-प्रदर्शन का रास्ता नहीं अपनाना पड़ता।
धरना-प्रदर्शन के दौरान आदिल, शमशाद, अफजल, अब्दुल, मुंशी जमील, मास्टर रूपकिशोर, पंकज सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में गांव की बिजली व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त करने की मांग उठाई।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही बिजली आपूर्ति सुचारु नहीं की गई और गांववासियों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो ग्रामीण आंदोलन को और व्यापक रूप देंगे तथा उच्च अधिकारियों का घेराव करने के लिए भी बाध्य होंगे।

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