दैनिक अयोध्या टाइम्स गाजियाबाद
गाजियाबाद। जहां एक तरफ सरकार जनता को राहत देने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ लालची गैंग आम आदमी की रसोई पर डाका डालने में लगे हैं। गैस सिलेंडर की किल्लत और बढ़ती कीमतों के बीच कालाबाजारी का ऐसा जाल सामने आया है, जिसने सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
जब गाड़ियां पूरी आ रही हैं, तो गैस कहां जा रही है?
गोविंदपुरम बना कालाबाजारी का अड्डा!
ताजा मामला गोविंदपुरम इलाके से सामने आया है, जहां बी.एस. गैस एजेंसी के कर्मचारियों पर बेहद गंभीर आरोप लगे हैं। सूत्रों के मुताबिक, एजेंसी से जुड़े कुछ लोग सुनसान जगहों और खाली प्लॉट्स में गाड़ियों को खड़ा कर घरेलू सिलेंडरों से गैस निकालकर दूसरे सिलेंडरों में अवैध तरीके से भरते हैं और फिर इन्हें बाजार में ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता है।सिर्फ कालाबाजारी नहीं, जान से खिलवाड़ भी!
यह अवैध रिफिलिंग किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है। बिना सुरक्षा मानकों के गैस ट्रांसफर करना कभी भी विस्फोट जैसी घटना को जन्म दे सकता है।

एजेंसी के बाहर लाइन, अंदर खेल चालू!
हैरानी की बात यह है कि एजेंसी पर रोज गैस की गाड़ियां पहुंच रही हैं, लेकिन आम जनता को यही कहा जा रहा है “सिलेंडर खत्म हो गए!”
लोग कई-कई दिन तक एजेंसी के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें खाली हाथ लौटाया जा रहा है।
एजेंसी पर एक गाड़ी, बाकी कहां गायब?” जनता के सवालों से हड़कंप
फर्जी एंट्री का बड़ा खेल!
सबसे चौंकाने वाला खुलासा कई उपभोक्ताओं की कनेक्शन किताब में सिलेंडर जारी दिखाया जा रहा है, जबकि उन्होंने सिलेंडर लिया ही नहीं!
सवाल ये उठता है आखिर वो सिलेंडर गया कहां?
विरोध किया तो मारपीट!
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब कोई इस धांधली का विरोध करता है, तो एजेंसी कर्मचारी उससे बदसलूकी और मारपीट तक पर उतर आते हैं।
जनता की गुहार: “अब तो कार्रवाई करो!”
इलाके के लोगों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यह खेल लंबे समय से चल रहा था, लेकिन अब सच सामने आने के बाद प्रशासन को सख्त एक्शन लेना ही होगा।
सरकार सख्त, लेकिन जमीन पर ढीलाई?
सरकार और आपूर्ति विभाग लगातार कह रहे हैं कि गैस की कोई कमी नहीं है और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई होगी। कई जगह छापेमारी भी हो चुकी है, लेकिन सवाल यही है
क्या गाजियाबाद में भी ऐसे गैंग पर लगेगी लगाम?
जनता का सीधा सवाल:
“जब सिलेंडर आ रहे हैं, तो हमें क्यों नहीं मिल रहे?
और अगर हमारी किताब में एंट्री हो चुकी है, तो हमारा हक किसने खा लिया?”

अब देखना होगा प्रशासन इस ‘गैस खेल’ पर कब और कैसे करता है सबसे बड़ा वार





