मिर्जापुर ब्यूरो। जनपद में मानवाधिकारों के संरक्षण के नाम पर एक निजी संस्था द्वारा अवैध समानांतर व्यवस्था चलाने और सरकारी अधिकारियों को धमकाने का एक गंभीर मामला सामने आया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस शिकायत को बेहद गंभीरता से लेते हुए मिर्जापुर के जिला मजिस्ट्रेट (DM) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को मामले की गहन जांच कर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
मिर्जापुर जिले के कोन ब्लॉक अंतर्गत पाखावैया (चिल्लाह) निवासी नितेश उपाध्याय ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, ‘समग्र मानवाधिकार एसोसिएशन’ नामक एक निजी संस्था अपने नाम का दुरुपयोग कर रही है। यह संस्था गैर-कानूनी तरीके से ‘TIR’ (टॉर्चर इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट – Torture Information Report) के नाम से एक समानांतर व्यवस्था संचालित कर रही है।
आरोप है कि यह संस्था खुद को मानवाधिकार आयोग का असली प्रतिनिधि बताकर आम जनता के बीच भ्रम फैला रही है, अवैध रूप से धन उगाही (वसूली) कर रही है और सरकारी अधिकारियों को डरा-धमका रही है। पीड़ित ने आयोग से इस संस्था के क्रियाकलापों की जांच कर इसे प्रतिबंधित करने और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की थी।
आयोग की चौखट पर पहुंचा मामला
पीड़ित नितेश उपाध्याय ने इस मामले को लेकर 26 अप्रैल 2026 को मानवाधिकार आयोग में ऑनलाइन आवेदन किया था (डायरी संख्या: 9220/IN/2026)। आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 19 मई 2026 को इसका पंजीकरण किया और अगले ही दिन यानी 20 मई 2026 को इस पर अपना कड़ा रुख साफ कर दिया।
NHRC ने दिए सख्त निर्देश, प्रशासन में मंचा हड़कंप
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस शिकायत का निपटारा विशेष निर्देशों (Disposed with Directions) के साथ करते हुए इसे सीधे वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) मिर्जापुर और जिला मजिस्ट्रेट (DM) मिर्जापुर को भेज दिया है।
आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि:
”इस शिकायत को कानून के अनुसार उचित कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को हस्तांतरित किया जाता है। संबंधित प्राधिकारी (DM और SSP) शिकायतकर्ता/पीड़ित को जांच में शामिल करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करें। जांच के बाद जो भी वैधानिक कार्रवाई की जाए, उससे शिकायतकर्ता को अवगत कराया जाए और साथ ही 4 सप्ताह के भीतर की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट (Action Taken Report) आयोग को अनिवार्य रूप से सौंपी जाए।”
मानवाधिकार आयोग के इस सीधे हस्तक्षेप के बाद अब मिर्जापुर प्रशासन हरकत में आ गया है और इस फर्जी संस्था के खिलाफ जल्द ही बड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।




