रायबरेली ब्यूरो । मंगलवार 10 फरवरी को सामाजिक संगठन विश्व दलित परिषद, उoप्रo, रायबरेली के बैनर तले संगठन के जगतपुर ब्लॉक, अध्यक्ष रमेश गौतम के नेतृत्व में दबंग, भूमाफिया ग्राम पंचायत हरदी टीकर के पूर्व प्रधान, वर्तमान प्रधान प्रतिनिधि, अमरेश बहादुर सिंह के प्रभाव से गुपचुप तरीके से अपने 9 चहेते,अपात्रों को आवासीय भूमि पट्टा किए जाने एंव अपने प्रभाव से अपनी पत्नी कंचन सिंह शिक्षा मित्र के नाम शराब ठेके का लाइसेंस कराए जाने को लेकर एंव ग्राम पंचायत में फैले,व्याप्त भ्रष्टाचार किए जाने को ग्रामीणों ने जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में अनिश्चित कालीन धरने पर बैठकर उक्त प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर अपात्रों का पट्टा निरस्त किये जाने को लेकर एंव शिक्षा मित्र को बर्खास्त किये जाने को लेकर जिला अधिकारी को संबोधित मांग पत्र नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा।
मौके पर नगर मजिस्ट्रेट द्वारा 1सप्ताह में निष्पक्ष जांच कराकर सम्मलितो के ऊपर कड़ी कानूनी कार्यवाही का आश्वासन दिए जाने के बाद उक्त धरने को स्थगित कर दिया गया। ग्रामीणों ने बहुजन नेता, विश्व दलित परिषद के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुरील के नेतृत्व में आवाज बुलंद की है जिसमें दर्जनों महिला पुरुषों ने शामिल होकर रोष व्यक्त किया और आरोप लगाया कि पूर्व ग्राम प्रधान, वर्तमान प्रधान प्रतिनिधि दबंग, भूमाफिया अमरेश बहादुर सिंह ने लेखपाल एंव तहसील संबंधित अधिकारियों से सांठगांठ करके वर्ष 2022 में अपने चहेते ,अपात्रो को पट्टा करा दिया जिसकी शिकायत ग्रामीणों ने वर्ष 2023 मे तत्कालीन जिलाधिकारी महोदय से की थी।

भ्रष्टाचार छुपाने को लेकर संबंधित तहसील के अधिकारियों ने उन्हीं शिकायतकर्ताओं के खिलाफ जो लगभग 100 वर्षों से उपरोक्त जमीन पर मकान बनाकर रह रहे, लोगों के विरूद्ध धारा 67 की कार्रवाई कर बेदखली की नोटिस जारी कर शिकायत कर्ताओं को परेशान प्रताड़ित किए जा रहा हैं और पूर्व प्रधान ने अपने प्रभाव से तथ्यों को छुपा कर अपनी पत्नी कंचन सिंह शिक्षा मित्र के नाम एक शराब ठेके का आवंटन भी करा लिये जाने एंव ग्राम पंचायत में विकास के नाम पर किये गये व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर कई बार शिकायत करने के बावजूद , जिला प्रशासन द्वारा कोई कानूनी कार्रवाई की गई और ना ही शिकायत कर्ताओं की कोई सुनवाई नहीं की गई। धरना प्रदर्शन में रानी गौतम,अवध राज, अनुज, राम नरेश, ओम प्रकाश, राम बहादुर, अमरनाथ दिलीप कुमार राम स्वरूप, छेदी लाल, सुख लाल, ऊषा, सहदुईशा आदि दर्जनों महिला पुरुष ने अपना विरोध दर्ज किया।





