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ईद-उल-अज़हा (बकरीद) के मुकद्दस मौके पर क़ारी अमान रज़ा ख़ान का मुल्क और जनपद के नाम इत्तेहाद (एकरूपता) और मोहब्बत का पैगाम

"अल्लाह की राह में कुर्बानी और ईसार (समर्पण) का यह पर्व समाज में बाहमी भाईचारे, कौमी यकजहती और इंसानी हमदर्दी को मजबूत करने का अजीम जरिया है" — क़ारी अमान रज़ा ख़ान

EDITED BY: Ground Reporter

UPDATED: Tuesday, May 26, 2026

सोनभद्र / राबर्ट्सगंज। इस्लाम धर्म के निहायत मुकद्दस और तारीखी त्योहार ईद-उल-अज़हा (बकरीद) के आमद के मौके पर मारूफ़ मजहबी रहनुमा और सामाजिक चिंतक क़ारी अमान रज़ा ख़ान ने तमाम मुल्कवासियों, जनपदवासियों और मुस्लिम उम्माह को दिली मुबारकबाद और पुरखुलूस शुभकामनाएं पेश की हैं। उन्होंने इस बरकत वाले मौके पर मुल्क की सालमियत (अखंडता) को बनाए रखने के लिए समाज के हर तबके से ‘इत्तेहाद’ (आपसी एकता), ‘मोहब्बत’ और रवादारी (सांप्रदायिक सौहार्द) को सबसे ऊपर रखने की अपील की है।

कुर्बानी और सुन्नत-ए-इब्राहिमी का पैगाम:

क़ारी अमान रज़ा ख़ान ने सुन्नी मुस्लिम लॉ (हनीफ़ी फिकह) की रौशनी में पर्व के रूहानी और शरई (कानूनी) मकासिद पर रौशनी डालते हुए कहा कि, “ईद-उल-अज़हा असल में रज़ा-ए-इलाही (अल्लाह की मर्जी) के लिए अपनी सबसे अजीज शय को कुर्बान करने और नफ्स (अहंकार) को फना करने का नाम है। हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की यह मुकद्दस सुन्नत हमें सिखाती है कि इंसानियत, मिल्लत और वतन की खातिर हर जाती (व्यक्तिगत) स्वार्थ को छोड़ देना ही सच्चा दीन है।”

‘इत्तेहाद’ (एकता) और भाईचारे की अपील:

उन्होंने मुल्क के मौजूदा सामाजिक हालात का हवाला देते हुए कहा कि आज के दौर में समाज को अंदरूनी तौर पर मुत्तहिद (एकजुट) और मजबूत करने के लिए आपसी रब्त और इत्तेहाद बेहद जरूरी है। हमारा मुल्क गंगा-जमुनी तहजीब का एक खूबसूरत गुलदस्ता है। हमें मजहबी तफ़रीक़ (भेदभाव) से ऊपर उठकर मुल्क की तरक्की में अपना किरदार अदा करना होगा।

अमन और पाकीजगी के साथ त्योहार मनाने की गुजारिश:

क़ारी अमान रज़ा ख़ान ने अवाम से अपील की है कि हुकूमत और इंतजामिया (प्रशासन) की तरफ से जारी की गई गाइडलाइंस, पाकीजगी (स्वच्छता) और सुन्नत-ए-तरीके का पूरा एहतराम करते हुए त्योहार को अमन-ओ-अमां और पुरसुकून तरीके से मनाएं, ताकि किसी भी शहरी को कोई तकलीफ न पहुंचे। उन्होंने दुआ की कि यह ईद हमारे मुल्क में अमन-चैन, खुशहाली और आपसी भाईचारे का एक नया सवेरा लेकर आए।

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