जिलाधिकारी ने कलेक्ट्रेट कार्यालयों एवं विकास भवन के विभिन्न कार्यालयों का किया निरीक्षण - भाजपा हर घर तिरंगा" अभियान एवं DLP अभियान के तहत बरहा मंडल कार्यशाला हुई सम्पन्न। - विकसित भारत - जी राम जी अधिनियम, 2025 के लागू होने के पर गांधी सभागार में हुआ आयोजन। - उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने राष्ट्रपति भवन से आमंत्रण मिलने पर रेणुका गोस्वामी को दी बधाई - लोक कलाओं के संरक्षण और कलाकारों के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में संस्कृति विभाग की अभिनव पहलजिलाधिकारी ने कलेक्ट्रेट कार्यालयों एवं विकास भवन के विभिन्न कार्यालयों का किया निरीक्षण - भाजपा हर घर तिरंगा" अभियान एवं DLP अभियान के तहत बरहा मंडल कार्यशाला हुई सम्पन्न। - विकसित भारत - जी राम जी अधिनियम, 2025 के लागू होने के पर गांधी सभागार में हुआ आयोजन। - उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने राष्ट्रपति भवन से आमंत्रण मिलने पर रेणुका गोस्वामी को दी बधाई - लोक कलाओं के संरक्षण और कलाकारों के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में संस्कृति विभाग की अभिनव पहल

इंसाफ : देर है अंधेर नही और आई ए एस प्रकरण..!

पुनः विवेचना के कोर्ट के आदेश

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Thursday, December 11, 2025

Justice: Delay is not injustice and IAS case..!

राजकुमार पाठक/राजेंद्र शुक्ला
बांदा/
कानून के हाथ बहुत लंबे होते है और सत्य की जीत होती है, ने एक बार फिर लोगो में तब विश्वास भर दिया जब एक आई ए एस द्वारा की गई बेइंसाफी को लेकर पीड़िता की प्रार्थना पर हुई एफ आई आर और बचाने के लिए विवेचना दौरान लगाई गई एफ आर मा0 न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने एफ आर को निरस्त करते हुए पीड़िता के प्रोटेस्ट पर पुनः विवेचना का आदेश पारित किया। इस आदेश को पीड़िता पक्ष सहित आम जन मानस ने कहा है कि इंसाफ के घर में देर है अंधेर नही।

शायद, आज़ादी के 88 साल के बाद बांदा के इतिहास में पहली बार नाइंसाफी करने पर यहां पर तैनात एक नौकरशाह(आई ए एस) सहित आधा दर्जन दोषियों पर गंभीर धाराओं में मुकदमा कोतवाली नगर में 3 साल पहले अगस्त 2022 में लिखा गया था, जिसमे नौकरशाही के दवाब में पुलिस के एक मामूली से दरोगा ने एफ आर लगा कर मामले को तात्कालिक समय खत्म जैसा कर दिया था, लेकिन वादी ने संबंधित न्यायालय में प्रोटेस्ट पिटीशन में अपनी बात जरिए फौजदारी के विद्वान अधिवक्ता सुरेश कुमार निषाद के जरिए रखी जहां उनके तर्कों और तथ्यों को देखते हुए माननीय मुख्यन्यायिक दंडाधिकारी ने एफ आर को निरस्त करते हुए पुनः विवेचना का आदेश पारित किया है। जिसको लेकर जिले की नौकर शाही में अफरातफरी का माहौल कायम हो गया।

बताते चले कि आज से लगभग 3 साल पहले जनपद की सदर तहसील में तैनात रहे उपजिलाधिकारी सुधीर गहलौत को सतर्कता अधिष्ठान झांसी के पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर जिलाधिकारी बांदा ने एक ऐसे मामले की जांच सौंपी थी, जिसमे एक गरीब मजलूम विधवा रीना को कालोनी आवास आवंटित करने में पात्र घोषित किया गया था, लेकिन डूडा के कर्मचारी शारदा यादव ने रीना की पात्रता में एक शब्द “न” जोड़कर अपात्र बना दिया, मामले की शिकायत पर “न” शब्द की जांच में उपजिलाधिकारी ने लगभग 15 महीने का समय लगाया, जिसमे कई कर्मचारियों को दोषी पाया, जिसकी रिपोर्ट तत्कालीन आशु लेखक की कारगुजारियो के चलते लीक हो गई, और अखबारों के जरिए सार्वजनिक हो गई और सुर्खियां बटोरने लगी।

दुस्साहस की हद तब हो गई जब आई ए एस अधिकारी ने अपनी ही जांच रिपोर्ट लगभग 4 माह बाद बदल दी और बदली हुई जांच रिपोर्ट भी एन केन प्रकारेण पीड़िता के हाथ लग गई फिर क्या था पीड़िता ने बदली रिपोर्ट सहित हुई बेइंसाफी को लेकर महामहिम राजपाल से लगाकर अन्य उच्चाधिकारियों से इंसाफ की मांग की। चलते चलते जब उसके हाथ इंसाफ न लगा, तो पीड़िता ने न्यायालय का दरवाजा खट खटाया, जिस पर माननीय न्यायालय के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने पुलिस विवेचना को असंवैधानिक करार देते हुए निरस्त कर दिया और पुनः विवेचना का आदेश जारी कर, मामले को नया मोड़ दे दिया , नौकर शाही के बीच जहां इस फैसले को लेकर हलचल मच गई वही कर्मचारियों के बीच प्रश्नगत प्रकरण की जबरजस्त चर्चा है। आगे प्रश्नगत प्रकरण को लेकर क्या मोड़ आता है यह तो भविष्य की कोख में है।

खबरें और भी

उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिले