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युवा एमपी-एमएलए, जो भारतीय युवाओं के लिए बने राजनीतिक प्रेरणा: डॉ. अतुल मलिकराम (राजनीतिक रणनीतिकार)

दलित समाज से आने वाले पुष्पेंद्र ने बीजेपी के दिग्गज उम्मीदवार को हराकर सामाजिक न्याय तथा युवा मुद्दों पर अपनी मजबूत पकड़ साबित की

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Monday, January 5, 2026

Young MPs and MLAs who have become a political inspiration for Indian youth: Dr. Atul Malikram (Political Strategist)

आयुष गुप्ता संवाददाता: भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उसके निरंतर नवीन बने रहने की क्षमता में है। हर चुनाव के साथ नई पीढ़ी संसद और विधानसभाओं में प्रवेश करती है और देश की राजनीति को नई ऊर्जा, नई सोच तथा नई दिशा प्रदान करती है। 18वीं लोकसभा तथा हाल की विधानसभा चुनावों में भी कई ऐसे युवा चेहरे चुनकर सदन में पहुंचे हैं, जो अभी महज 25 से 30 वर्ष के बीच के हैं।

ये युवा नेता न केवल अपनी कम उम्र के लिए चर्चा का विषय बने हैं, बल्कि अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति, जनता से गहरा जुड़ाव, आधुनिक मुद्दों पर स्पष्ट सोच तथा परंपरागत राजनीति से हटकर नए तरीके अपनाने के लिए भी सराहे जा रहे हैं। हालांकि इनके सामने अनुभव की कमी, राजनीतिक दबाव तथा जिम्मेदारी का बोझ जैसी चुनौतियां भी हैं, लेकिन यदि ये संतुलन बनाए रखें तथा जनसेवा को सर्वोपरि रखें, तो भारत का भविष्य निश्चित रूप से उज्ज्वल तथा समृद्ध होगा।

भारतीय लोकतंत्र के कुछ चुनिंदा युवा चेहरों में बिहार के समस्तीपुर से लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की सांसद शांभवी चौधरी प्रमुख हैं। राज्य मंत्री की बेटी होने के बावजूद शांभवी ने अपनी व्यक्तिगत मेहनत, सोशल मीडिया का कुशल उपयोग तथा स्थानीय मुद्दों पर मजबूत पकड़ से कांग्रेस के मजबूत प्रतिद्वंद्वी को एक लाख से अधिक वोटों के बड़े अंतर से पराजित किया।

आज शांभवी शिक्षा, महिला सशक्तिकरण तथा ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर सक्रिय हैं और संसद में युवा आवाज को बुलंद कर रही हैं। वहीं उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी के दो युवा चेहरे पुष्पेंद्र सरोज तथा प्रिया सरोज ने भी सबको चौंकाने का काम किया है। कौशांबी से सांसद बने पुष्पेंद्र सरोज चुनाव के समय सबसे युवा सांसदों में शुमार थे।

दलित समाज से आने वाले पुष्पेंद्र ने बीजेपी के दिग्गज उम्मीदवार को हराकर सामाजिक न्याय तथा युवा मुद्दों पर अपनी मजबूत पकड़ साबित की। इसी तरह मछलीशहर से सांसद प्रिया सरोज ने पूर्व सांसद की बेटी होने के बावजूद अपनी अलग पहचान बनाई और 35,850 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। प्रिया महिला सशक्तिकरण, शिक्षा तथा स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दे रही हैं और युवा महिलाओं की आवाज बनकर उभरी हैं।

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