सोनभद्र/मिर्जापुर: जनपद में मानवाधिकारों के संरक्षण का दावा करने वाले संगठन ‘समग्र मानवाधिकार एसोसिएशन’ के भीतर आंतरिक कलह और दबाव की राजनीति का मामला गरमाता नजर आ रहा है। संगठन के सोनभद्र जिला अध्यक्ष मुमताज अली और मिर्जापुर के पूर्व उपाध्यक्ष नितेश उपाध्याय के बीच हुई बातचीत का एक कथित ऑडियो सामने आया है, जिसमें मुमताज अली पूर्व उपाध्यक्ष पर संगठन में वापस लौटने और पद संभालने के लिए भारी दबाव बनाते सुनाई दे रहे हैं।
मर्यादाओं को ताक पर रखकर दी जा रही नसीहत
वायरल ऑडियो में मुमताज अली द्वारा नितेश उपाध्याय को संगठन की मजबूती की दुहाई देते हुए वापस आने को कहा जा रहा है। बातचीत के दौरान मुमताज अली का लहजा काफी सख्त और प्रभाव जमाने वाला है। वे नितेश उपाध्याय को यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि संगठन में रहने से ही उनकी ताकत बनी रहेगी, जबकि नितेश उपाध्याय पूर्व में हुए खराब अनुभवों और संगठन के भीतर मिली ‘बदनामी’ का हवाला देकर खुद को इससे दूर रखने की बात कह रहे हैं।
बदनामी और अभद्रता का लगा आरोप
नितेश उपाध्याय ने स्पष्ट किया कि संगठन में रहते हुए उन्हें सम्मान के बजाय अपमान झेलना पड़ा है। उन्होंने पूर्व की घटनाओं का जिक्र करते हुए बताया कि किस तरह संगठन के ही लोगों द्वारा फैलाए गए भ्रम के कारण उन्हें अभद्रता का सामना करना पड़ा था। बावजूद इसके, मुमताज अली द्वारा उनकी बातों को दरकिनार कर लगातार ‘सिपाही’ बनने और संगठन में वापस आने का दबाव बनाया जा रहा है, जो किसी भी लोकतांत्रिक संस्था की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाता है।
सत्ता और रसूख का दिखाया जा रहा डर?
बातचीत के दौरान मुमताज अली द्वारा बड़े अधिकारियों और राजनीतिक रसूख का हवाला भी दिया गया, जिसे नितेश उपाध्याय पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। संगठन के भीतर चल रही इस खींचतान ने यह साफ कर दिया है कि मानवाधिकारों की बात करने वाले खुद अपने पूर्व पदाधिकारियों की इच्छा और स्वाभिमान का सम्मान नहीं कर पा रहे हैं।
क्षेत्र में चर्चा का विषय
यह मामला अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। जानकारों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को उसकी मर्जी के बिना किसी संगठन में बने रहने के लिए विवश करना अनैतिक है। अब देखना यह होगा कि इस दबाव की राजनीति के बाद नितेश उपाध्याय क्या रुख अपनाते हैं और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी इस विवाद पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं।
मुमताज अली का दबावपूर्ण तर्क:
”मुमताज अली ऑडियो में स्पष्ट रूप से नितेश उपाध्याय को यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि संगठन में वापस आ जाओ, संगठन सिपाही से ही मजबूत होता है। उन्होंने सत्ता और रसूख का हवाला देते हुए यहाँ तक कह दिया कि ‘यदि हमारे पास दम है तो हमें किसी चेयरमैन या नेता की जरूरत नहीं है, हमारी वाणी में दम होना चाहिए।’ यह बयान दर्शाता है कि किस तरह संगठन के नाम पर व्यक्तिगत प्रभाव जमाने की कोशिश की जा रही है।”
नितेश उपाध्याय की तीखी प्रतिक्रिया:
”वहीं नितेश उपाध्याय ने दबाव को खारिज करते हुए मुमताज अली को आइना दिखाया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ‘मैं संगठन का मेम्बर नहीं बनना चाहता, आप मुझ पर ऐसा दबाव मत डालिए।’ उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि संगठन के लिए काम करने के बदले उन्हें सिर्फ बदनामी और अपमान मिला है, यहाँ तक कि पूर्व में उन्हें अभद्र व्यवहार का भी सामना करना पड़ा था, जिसे वे अब और बर्दाश्त नहीं करेंगे।”






