सक्ती जिले के लोकप्रिय कलेक्टर अमृत विकास तोपनो को दी गई भावभीनी विदाई, अधिकारियों-कर्मचारियों ने साझा किए यादगार अनुभव - टीचर कॉलोनी के पास मिली लाश .. चेहरे में चोट .. हत्या या घटना .. - थाना नवागढ़ पुलिस की बड़ी रेड कार्यवाही—02 किलो गांजा के साथ आरोपी गिरफ्तार - रसोइयों का सम्मान समारोह एवं कैशलेस डिजिटल कार्ड वितरण कार्यक्रम का किया गया आयोजन - बछरावां में सपा का विशाल पीडीए सम्मेलन हुआ आयोजितसक्ती जिले के लोकप्रिय कलेक्टर अमृत विकास तोपनो को दी गई भावभीनी विदाई, अधिकारियों-कर्मचारियों ने साझा किए यादगार अनुभव - टीचर कॉलोनी के पास मिली लाश .. चेहरे में चोट .. हत्या या घटना .. - थाना नवागढ़ पुलिस की बड़ी रेड कार्यवाही—02 किलो गांजा के साथ आरोपी गिरफ्तार - रसोइयों का सम्मान समारोह एवं कैशलेस डिजिटल कार्ड वितरण कार्यक्रम का किया गया आयोजन - बछरावां में सपा का विशाल पीडीए सम्मेलन हुआ आयोजित

मोहर्रम में सुन्नी उलेमा का पैग़ाम-ए-अमन व इत्तेहाद

सुन्नत के मुताबिक मोहर्रम मनाने और ग़ैर-शरई रस्मों से बचने की नसीहत

EDITED BY: Ground Reporter

UPDATED: Monday, June 22, 2026

सोनभद्र ब्यूरो। मोहर्रमुल हराम की आमद पर जनपद के सुन्नी उलेमा-ए-किराम ने उम्मत-ए-मुस्लिमा को तक़वा, सब्र, इबादत और तालीमात-ए-अहले सुन्नत पर अमल करने की ताकीद की है। मशहूर इस्लामिक स्कॉलर मौलाना इबादत हुसैन नूरी सोनभद्री ने अपने पैग़ाम में फरमाया कि मोहर्रमुल हराम इस्लामी साल का पहला और बरकत वाला महीना है। यह महीना हमें सब्र, इस्तिक़ामत, कुर्बानी और दीन-ए-हक़ पर डटे रहने का सबक देता है। उन्होंने कहा कि मैदान-ए-कर्बला का वाक़िआ पूरी इंसानियत के लिए मशअल-ए-राह है, जहां हज़रत इमाम हुसैन (रज़ियल्लाहु अन्हु) और उनके रुफ़का ने दीन की सरबलंदी के लिए अज़ीम कुर्बानी पेश की।

वहीं जामा मस्जिद रॉबर्ट्सगंज के इमाम मौलाना तौफ़ीक आलम ने कहा कि मोहर्रम के हवाले से मुसलमानों को कुरआन, हदीस और अकाबिर-ए-अहले सुन्नत की तालीमात को सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुन्नी अक़ीदे और मोतबर सुन्नी किताबों की रौशनी में शिया राफ़ज़ियों के कई बातिल अक़ायद और रसूमात का रद्द मौजूद है। लिहाज़ा मुसलमानों को अहले सुन्नत व जमाअत के मस्लक पर मज़बूती के साथ क़ायम रहना चाहिए।

उलेमा-ए-किराम ने वाज़ेह किया कि मोहर्रम के नाम पर ढोल, ताशा, बाजा बजाना, शोर-ओ-गुल करना और ग़ैर-शरई रस्मों को फ़रोग़ देना शरीअत-ए-मुतह्हरा की तालीमात के खिलाफ है। मोहर्रम इबादत, ज़िक्र-ओ-अज़कार, तिलावत-ए-कुरआन, रोज़ा, सदक़ा और वाक़िआ-ए-कर्बला से इबरत हासिल करने का महीना है, न कि नुमाइश और ग़ैर-दिनी मशग़लों का।

इस मौके पर मौलाना सगीर अहमद, मौलाना अंसारुल हक़ नूरी, मौलाना बहज़ाद अनवर, हाफ़िज़ जाबिर,हाफिज मुख्तार रज़ा अहरौरा, मौलाना अली खान बरकाती, मौलाना क़ारी मुश्ताक अहमद समेत दीगर उलेमा-ए-किराम ने भी अपने ख़िताब में कहा कि यौमे आशूरा बड़ी फ़ज़ीलत वाला दिन है। इस दिन रोज़ा रखना, दुआ करना और नेक आमाल में मशगूल रहना सुन्नत से साबित है।

उलेमा ने नौजवानों से ख़ुसूसी अपील की कि वे मोहर्रम के दौरान अमन, भाईचारे और शरीअत की पाबंदी को अपनाएं तथा हर उस काम से बचें जो दीन की तालीमात के खिलाफ हो।

आख़िर में तमाम उलेमा-ए-किराम ने मुल्क में अमन-ओ-अमान, कौमी यकजहती, भाईचारे और पूरी इंसानियत की भलाई के लिए ख़ुसूसी दुआ की।

खबरें और भी

उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिले