लखनऊ। राजस्थान के श्रीगंगानगर में दरिंदगी का शिकार हुई 13 वर्षीय बालिका की मौत के बाद रविवार को राजधानी लखनऊ के मुंशी पुलिया मेट्रो स्टेशन पर शोकसभा एवं पदयात्रा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं, महिलाओं और नागरिकों ने शामिल होकर पीड़िता को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।
कार्यक्रम का आयोजन अरुणिमा वेलफेयर फाउंडेशन की संस्थापक एवं अधिवक्ता सुमिता तिवारी के नेतृत्व में सरस्वती बालिका इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या रीति कुशवाहा के सहयोग से किया गया। उपस्थित लोगों ने हाथों में तख्तियां लेकर पदयात्रा निकाली और महिलाओं एवं बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई।
इस अवसर पर अधिवक्ता सुमिता तिवारी ने कहा कि जिस समाज में आज भी बेटियां सुरक्षित नहीं हैं, उसे विकास से पहले आत्ममंथन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पांच दिनों तक आईसीयू में जिंदगी की जंग लड़ने के बाद मासूम बच्ची की मौत समाज के सामने कई गंभीर सवाल छोड़ गई है। उन्होंने कहा कि यह श्रद्धांजलि केवल शोक व्यक्त करने का अवसर नहीं, बल्कि पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए समाज की सामूहिक आवाज है।
कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता इला मिश्रा, उषा रघुवंशी, फाउंडेशन फॉर सोशल हेल्प की आमंत्रित सदस्य पिंकी वर्मा, सुधा तिवारी, श्वेता द्विवेदी हर उम्मीद फाउंडेशन की महामंत्री जिया मिश्रा, इला स्वाभिमान संस्था की अध्यक्ष सुमन मनराल, समाजसेविका नंदिता मिश्रा, सीमा दुबे, प्रीता पांडे सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं प्रबुद्ध नागरिकों ने भाग लिया। सभी ने दो मिनट का मौन रखकर पीड़िता को श्रद्धांजलि अर्पित की और दोषियों को शीघ्र एवं कठोर दंड दिलाने की मांग की।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने एक स्वर में कहा कि बेटियों की सुरक्षा केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कठोर कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ सामाजिक जागरूकता भी उतनी ही आवश्यक है।




