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पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों का जोरदार प्रदर्शन, प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा

टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले सभी मान्यता प्राप्त शिक्षक संगठनों के आह्वान पर सैकड़ों शिक्षक रामलीला मैदान में एकत्रित हुए

EDITED BY: DAT ब्यूरो चीफ

UPDATED: Friday, February 27, 2026

रोहित कुमार कशवाहा

शाहजहांपुर। वर्ष 2011 से पूर्व निर्धारित नियमावली एवं अर्हताओं के आधार पर नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता के विरोध में आज जनपद मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया गया। टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले सभी मान्यता प्राप्त शिक्षक संगठनों के आह्वान पर सैकड़ों शिक्षक दोपहर बाद खिरनीबाग रामलीला मैदान में एकत्रित हुए और सभा आयोजित कर आदेश को उत्पीड़नात्मक बताया।सभा के उपरांत लगभग 4:30 बजे शिक्षक पैदल मार्च करते हुए नारेबाजी के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंपा।

सभा को संबोधित करते हुए टीएफआई की राष्ट्रीय संगठन मंत्री अर्चना तिवारी ने कहा कि प्रत्येक शिक्षक शासन द्वारा निर्धारित योग्यताओं को पूर्ण कर चयनित हुआ है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में टीईटी वर्ष 2011 से लागू हुआ, किंतु बाद में नियमावली में संशोधन कर सभी शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता लागू कर दी गई, जिसके कारण माननीय न्यायालय द्वारा टीईटी उत्तीर्ण करने का निर्णय आया। उन्होंने उक्त संशोधन को निरस्त करने की मांग की।

जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के मंडल अध्यक्ष दिनेश गंगवार ने कहा कि अधिकांश शिक्षक 50 वर्ष की आयु पार कर चुके हैं और सेवानिवृत्ति के निकट हैं, ऐसे में परीक्षा की अनिवार्यता अन्यायपूर्ण है।प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मंत्री देवेश बाजपेई ने कहा कि किसी भी विभाग में कर्मचारियों पर नियुक्ति के समय लागू नियमावली ही प्रभावी होती है। वर्तमान नियमों के आधार पर पूर्व नियुक्त कर्मचारियों को परीक्षा के लिए बाध्य करना और असफल होने पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति जैसा दंड देना न्यायसंगत नहीं है।

फेडरेशन द्वारा प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि वर्ष 2009 में लागू एनसीटीई की अधिसूचना के बाद भी 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों का चयन तत्कालीन लागू नियमावली के अनुरूप हुआ था। ऐसे शिक्षक लगभग 30 वर्ष की सेवा पूर्ण कर सेवानिवृत्ति के निकट हैं, इसलिए इस चरण पर टीईटी अनिवार्यता लागू करना न्याय सिद्धांतों के विपरीत है।ज्ञापन में यह भी कहा गया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद शिक्षकों में व्यापक असंतोष व्याप्त है। फेडरेशन ने मांग की कि पूर्व नियुक्त शिक्षकों के मामले में विशेष विचार करते हुए सेवा से पृथक करने की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए और मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए।

धरना-प्रदर्शन में शिक्षक नेता रविंद्र पाल प्रजापति, डॉ. विनय गुप्ता, राजकुमार तिवारी, मंगरे लाल, विश्राम सिंह, अंकुर त्रिपाठी, यशपाल सिंह, नितिन मिश्रा, आदेश सिंह, विजय प्रताप सिंह, सरताज अली, नफीस खां, धनपाल सिंह, बृजेश कुमार वर्मा, सचिन अवस्थी, वारिस अली, राजकुमार सिंह, अजय कुमार, कवित कुमार, अवनीश यादव, धीरेंद्र कुमार, प्रदीप सिंह, अरविंद सिंह, सुनील सिंह, आनंद बिहारी, अरविंद त्रिपाठी, प्रदुम्न सिंह, विश्वनाथ प्रताप सिंह, गौरव पाण्डेय, सीमा सिंह, सुषमा गुप्ता, शैली चौधरी, रुचि गुप्ता, गायत्री शुक्ला, रेखा रस्तोगी, नीतू अधिकारी, अनुराधा अग्रवाल, शैफाली, रिचि गर्ग, रेनू शुक्ला, रीना राजपूत, आंचल, मानिका, साधना सहित सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं।

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