सड़क निर्माण में अवैध कब्जे को लेकर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, ईओ को सौंपा शिकायती पत्र - गंगा नदी का भीषण कटान, जटपुरा कैलिहाई में आधा दर्जन से अधिक मकान और झोपड़ियां नदी में समाईं - परशुराम मंदिर में ब्राह्मण सेवा समिति की बैठक समाजहित के मुद्दों पर हुआ मंथन - छत्तीसगढ़ में बाढ़ से निपटने की तैयारी तेज: 18 अगस्त को टेबल-टॉप और 20 को होगी मॉक ड्रिल - जब दिल्ली के मंच पर जीवंत हुई छत्तीसगढ़ की पंडवानी परंपरासड़क निर्माण में अवैध कब्जे को लेकर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, ईओ को सौंपा शिकायती पत्र - गंगा नदी का भीषण कटान, जटपुरा कैलिहाई में आधा दर्जन से अधिक मकान और झोपड़ियां नदी में समाईं - परशुराम मंदिर में ब्राह्मण सेवा समिति की बैठक समाजहित के मुद्दों पर हुआ मंथन - छत्तीसगढ़ में बाढ़ से निपटने की तैयारी तेज: 18 अगस्त को टेबल-टॉप और 20 को होगी मॉक ड्रिल - जब दिल्ली के मंच पर जीवंत हुई छत्तीसगढ़ की पंडवानी परंपरा

गंगा नदी का भीषण कटान, जटपुरा कैलिहाई में आधा दर्जन से अधिक मकान और झोपड़ियां नदी में समाईं

गंगा के कहर से बेघर हुए परिवार, मदद का इंतजार जारी

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Monday, August 10, 2026

फर्रुखाबाद। जनपद के शमशाबाद ब्लॉक क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत शरीफपुर छिछनी के मजरा जटपुरा कैलिहाई में गंगा नदी की विनाशकारी बाढ़ के बाद शुरू हुए तेज कटान ने विकराल रूप ले लिया है। लगातार हो रहे कटाव के कारण आधा दर्जन से अधिक परिवारों के सामने जीवनयापन और आशियाने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। नदी का तेज बहाव लगातार मकानों और झोपड़ियों को अपनी आगोश में लेता जा रहा है, जिससे ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ गई है।

बाढ़ के बाद तेज धारा में बहे आशियाने

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार बाढ़ के साथ आई नदी की तेज धारा ने कई कच्चे मकानों और झोपड़ियों को बहा दिया है। इस आपदा से प्रभावित होने वाले प्रमुख परिवारों में रघुवीर यादव, अभिनंदन, रक्षपाल तुकमान, राजवीर, संजय, मंजेश, मोहित, मनसुख राम, रईस, रजनीश, सुनील, राजीव और संजीव समेत कई अन्य लोग शामिल हैं। ग्रामीणों ने दर्द बयां करते हुए बताया कि पिछले वर्ष भी बाढ़ के दौरान उनके पक्के मकान कटकर गंगा नदी में समा गए थे। उस वक्त प्रशासन की ओर से उचित मुआवजे और मदद का आश्वासन दिया गया था, लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी उन्हें आज तक कोई आर्थिक सहायता नहीं मिल सकी है।

आवागमन ठप और पेयजल की गंभीर समस्या

मौजूदा समय में कटान की रफ्तार इतनी तेज है कि ग्रामीणों के पास अपने सामान के साथ सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए रास्ता तक नहीं बचा है। चारों तरफ पानी भरा होने के कारण आवागमन पूरी तरह ठप हो चुका है और पीने के पानी की भी गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। बेघर हुए परिवार खुले आसमान के नीचे और भय के साए में दिन-रात गुजारने को मजबूर हैं।

प्रशासनिक सुस्ती से ग्रामीणों में रोष

पीड़ित ग्रामीणों का आरोप है कि अभी तक कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या प्रशासनिक कर्मचारी सुध लेने मौके पर नहीं पहुंचा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल निम्नलिखित मांगें उठाई हैं:कटान को रोकने के लिए तटबंध पर युद्धस्तर पर बोल्डर पिचिंग कराई जाए। प्रभावित और बेघर हुए परिवारों को तुरंत सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाए। पिछले वर्ष हुए नुकसान का मुआवजा जल्द से जल्द दिलाया जाए।

प्रशासन का पक्ष

उधर प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि राजस्व और सिंचाई विभाग की टीमें स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और जल्द ही मौके का जायजा लिया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, नुकसान का आकलन कर उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भे

पीड़ित ग्रामीणों का आरोप है कि अभी तक कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या प्रशासनिक कर्मचारी सुध लेने मौके पर नहीं पहुंचा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल निम्नलिखित मांगें उठाई हैं:कटान को रोकने के लिए तटबंध पर युद्धस्तर पर बोल्डर पिचिंग कराई जाए। प्रभावित और बेघर हुए परिवारों को तुरंत सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाए। पिछले वर्ष हुए नुकसान का मुआवजा जल्द से जल्द दिलाया जाए।

प्रशासन का पक्ष

उधर प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि राजस्व और सिंचाई विभाग की टीमें स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और जल्द ही मौके का जायजा लिया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, नुकसान का आकलन कर उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जा रही है, जिसके आधार पर प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

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