मुरादाबाद: ससुराल से जेवर चोरी के आरोप में नवविवाहिता समेत 2 गिरफ्तार, डिलारी पुलिस ने किया खुलासा - ब्रिटिश राज के खिलाफ सबसे बड़ा आन्दोलन था अगस्त क्रान्ति - मुकेश रस्तोगी - शिक्षा की राह में छोटा-सा योगदान, बच्चों के सपनों को नई उड़ान : मंत्री श्री राजेश अग्रवाल - बाढ़ के कटान से गांव के 17 घर गंगा में समाए - तेजतर्रार पुलिसिंग का नतीजा, रोटावेटर समेत ट्रैक्टर बरामद,मुरादाबाद: ससुराल से जेवर चोरी के आरोप में नवविवाहिता समेत 2 गिरफ्तार, डिलारी पुलिस ने किया खुलासा - ब्रिटिश राज के खिलाफ सबसे बड़ा आन्दोलन था अगस्त क्रान्ति - मुकेश रस्तोगी - शिक्षा की राह में छोटा-सा योगदान, बच्चों के सपनों को नई उड़ान : मंत्री श्री राजेश अग्रवाल - बाढ़ के कटान से गांव के 17 घर गंगा में समाए - तेजतर्रार पुलिसिंग का नतीजा, रोटावेटर समेत ट्रैक्टर बरामद,

ब्रिटिश राज के खिलाफ सबसे बड़ा आन्दोलन था अगस्त क्रान्ति – मुकेश रस्तोगी

9 अगस्त 1942 अंग्रेजों भारत छोड़ो आन्दोलन की वर्षगांठ मनायी गयी- फलदार व सायादार पौधे रोपित कर राष्ट्र निर्माण का लिया संकल्प

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Sunday, August 9, 2026

रायबरेली ब्यूरो।। जनपद के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों द्वारा 9 अगस्त 1942 अंग्रेजों भरत छोड़ो आन्दोलन की वर्षगांठ मनायी गयी। इस अवसर पर फलदार एवं सायादार पौधे बैकुण्ठ धाम में रोपित कर राष्ट्र निर्माण का संकल्प लिया गया। उ0प्र0 उद्योग व्यापार प्रतिनिध मण्डल के प्रदेश संगठन मंत्री मुकेश रस्तोगी ने कहा कि अगस्त क्रांति (भारत छोड़ो आन्दोलन) की शुरूआत 8 अगस्त 1942 को बाम्बे के अगस्त क्रांति मैदान (गोवालिया टैंक मैदान) में महात्मा गांधी के आवाहन पर हुई थी। गांधी जी ने यहां करो या मरो का नारा दिया था। युसूफ मेहर अली द्वारा अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा दिया गया था। 9 अगस्त की सुबह तक सभी स्वतन्त्रता सेनानी ब्रिटिश हुकूमत द्वारा गिरिफ्तार कर लिए गए थे। नेताओं की गिरिफ्तारी के बाद आमजन ने आन्दोलन की कमान संभाल ली थी। ब्रिटिश राज के खिलाफ यह सबसे बड़ा आन्दोलन था। सेन्ट्रल बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष ओपी यादव ने कहा कि अगस्त क्रान्ति आन्दोलन के साथ देश में क्रांतिकारी संघर्ष की नयी धारा संगठित हुई बढ़े। उनके क्रांतिकारी कारनामो की गाथा और बलिदानों से हमारा स्वतन्त्रता आन्दोलन गौरवान्वित है। गिलहरी प्रयास मानव धर्म मिशन के अध्यक्ष डा0 आदर्श शुक्ला ने कहा कि इस ऐतिहासिक दिन में पौधे रोपित कर राष्ट्र निर्माण में संकल्प का एक लघु प्रयास है। इन्हीं पेड़ों के आक्सीजन से मानव जीवन संचालित होता है। संत गाडगे सेवक कमलेश चौधरी ने कहा कि 1942 की जनक्रांति ही थी, जहाँ से रियासतों में आजादी के आन्दोलन की संगठित शुरूवात मानी जा सकती है। ब्राहम्ण समाज सेवा संगठन के जिला सचिव राजेन्द्र कुमार बाजपेयी ने कहा असहयोग आन्दोलन के समय तक यहां प्रजामंडल तक नहीं थे। 1942 में यहां आजाद मोर्चे ने आन्दोलन की बागडोर संभाली। सेवारत स्वर्णकार संस्थान के संरक्षक भौमेश कुमार ने कहा कि अगस्त क्रांति आन्दोलन 1930 के दशक से प्रारम्भ से ही जन आक्रोश की क्रांतिकारी अभिव्यक्ति थी। इस अवसर पर पूर्व प्रधान भोला चौधरी, सेवानिवृत्त कर्मचारी संघ के अध्यक्ष देवनाथ पाल, राजेन्द्र कुमार, बैकुण्ठ धाम के सेवादार बाबा सोनी, महिला कर्मचारी राजकुमारी आदि लोगों ने अपने-अपने विचार व्यक्त किये।

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