फर्रुखाबाद। जिले में गंगा नदी का प्रकोप लगातार भयावह रूप लेता जा रहा है। सदर तहसील क्षेत्र के दिलीप की मड़ैया गांव में बाढ़ और कटान के चलते हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। नदी के तेज कटाव के कारण अब तक लगभग 17 घर गंगा में समा चुके हैं, जबकि अन्य खतरे की चपेट में आए मकानों को ग्रामीण खुद अपने हाथों से तोड़ने को मजबूर हैं।

ईंट और सरिया बचाने की मजबूरी
ग्रामीणों का कहना है कि उनके पास अब कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। गंगा के लगातार हो रहे भीषण कटान को देखते हुए वे अपने सपनों के आशियानों को खुद ही गिरा रहे हैं, ताकि कम से कम ईंट और सरिया जैसी कीमती निर्माण सामग्री को बचाया जा सके। लोगों का मानना है कि यदि वे ऐसा नहीं करते, तो पूरा मकान पानी में बह जाता। नावों के सहारे मलबे से ईंट और लोहे की सरिया को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है, ताकि भविष्य में दोबारा सिर पर छत जुटाई जा सके।

पीड़ित ग्रामीणों की जुबानी
एक ग्रामीण ने दर्द साझा करते हुए बताया कि “पिछले साल ही लाखों रुपये खर्च करके मकान बनवाया था। लेकिन अब गंगा लगातार कटान कर रही है और एक-दो दिन में पानी मकान तक पहुंच जाएगा, इसलिए मजबूरी में इसे खुद ही तोड़ना पड़ रहा है।”एक अन्य पीड़ित ने कहा कि “महंगाई के इस दौर में दोबारा मकान बनाना आसान नहीं है। सामान तो पहले ही बाहर निकाल लिया था, अब दीवारें गिरा रहे हैं ताकि कुछ ईंट और सरिया बच जाए।”एक अन्य ग्रामीण ने बताया कि “गांव के अधिकांश घर पहले ही गंगा में समा चुके हैं। मेरा इकलौता मकान बचा था, अब उसे भी खुद उजाड़ना पड़ रहा है। नाव के जरिए सामग्री सुरक्षित स्थान पर ले जाकर जहां जगह मिलेगी, नया आशियाना बनाएंगे।”
हर साल की मुसीबत, इस बार हालात ज्यादा भयावह
गौरतलब है कि फर्रुखाबाद में हर साल गंगा की बाढ़ और कटान का खतरा रहता है। पिछले वर्ष भी इस गांव में कटान की समस्या आई थी, लेकिन इस बार स्थिति पिछले सभी सालों से अधिक गंभीर और डरावनी हो गई है। पूरा गांव चारों तरफ से बाढ़ के पानी से घिर चुका है।
प्रशासन का पक्ष
इस पूरे मामले पर क्षेत्रीय लेखपाल रामबरन ने जानकारी देते हुए बताया कि जिन लोगों के मकान गंगा में समा रहे हैं या कटान की चपेट में आ रहे हैं, उन्हें शासन के नियमों के अनुसार उचित मुआवजा दिया जाएगा।फिलहाल, पूरे दिलीप की मड़ैया गांव में भय, निराशा और बेबसी का माहौल बना हुआ है, जहां ग्रामीण अपने ही हाथों से अपने सपनों के घरों को उजाड़ने का वीभत्स दृश्य देखने को विवश हैं।





