पूरनपुर।
धनारा घाट शारदा नदी के धनारा घाट पर अपनी जान की परवाह किए बिना नदी में डूब रहे लोगों की जान बचाने वाले बबलू माझी को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जिला अधिकारी ने सम्मानित किया। बबलू माझी ने संकट की घड़ी में अदम्य साहस और तत्परता का परिचय देते हुए अब तक दर्जनों लोगों को डूबने से बचाकर उनकी जिंदगी सुरक्षित की है।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में जिला अधिकारी ने बबलू माझी के साहस और मानवता के प्रति समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में अपनी सुरक्षा की चिंता किए बिना दूसरे लोगों की जान बचाना बेहद सराहनीय कार्य है। बबलू माझी जैसे लोग समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं और उनके साहस से अन्य लोगों को भी जरूरतमंदों की मदद करने की प्रेरणा मिलती है।
बताया जाता है कि शारदा नदी के धनारा घाट पर नदी का बहाव कई बार काफी तेज हो जाता है। ऐसे में स्नान अथवा नदी पार करने के दौरान लोगों के डूबने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। इन परिस्थितियों में बबलू माझी ने कई बार जोखिम उठाकर नदी में उतरकर डूब रहे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। उनकी तत्परता और तैराकी के कौशल के चलते कई परिवारों के घरों में खुशियां बरकरार रहीं।
बबलू माझी की इस बहादुरी को देखते हुए स्वतंत्रता दिवस पर जिला प्रशासन की ओर से उन्हें सम्मानित किया गया। सम्मान मिलने पर बबलू माझी ने कहा कि किसी की जान बचाना सबसे बड़ा मानव धर्म है। जब भी किसी व्यक्ति को नदी में डूबते हुए देखते हैं तो अपनी क्षमता के अनुसार उसे बचाने का प्रयास करते हैं।
जिला अधिकारी द्वारा किए गए इस सम्मान से क्षेत्र के लोगों में भी खुशी है। ग्रामीणों का कहना है कि बबलू माझी ने कई मौकों पर साहस का परिचय देकर लोगों की जान बचाई है। उनका सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत साहस का सम्मान है, बल्कि उन सभी लोगों के लिए भी प्रेरणा है जो मुश्किल समय में दूसरों की मदद के लिए आगे आते हैं।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे साहसी और समाजसेवी लोगों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित किए जाने से उनका उत्साह बढ़ता है तथा युवाओं में भी सेवा, साहस और मानवता की भावना मजबूत होती है।






