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फिलिस्तीनी कुरआन के सच्चे आशिक, उन्हें पूरी तरह मिटाया नहीं जा सकता: मौलाना बिलाल थानवी

मदरस़ा इस्लामिया इनामुल उलूम में भव्य हाफ़िज़ सम्मान समारोह आयोजित

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Thursday, January 22, 2026

Palestinians are true lovers of the Quran, they cannot be completely eradicated: Maulana Bilal Thanvi

मुजफ्फरनगर । मुजफ्फरनगर के प्रसिद्ध दीनि शिक्षण संस्थान मदरसा इस्लामिया इनामुल उलूम में हाफ़िज़-ए-कुरआन की दस्तारबंदी के अवसर पर भव्य मुबारकबादी जलसे का आयोजन किया गया। रूहानी और ईमान अफ़रोज़ माहौल में संपन्न हुए इस कार्यक्रम की अध्यक्षता मौलाना खालिद ज़ाहिद क़ासमी ने की, जबकि सिराजुल मिल्लत हज़रत मौलाना बिलाल थानवी मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद रहे।

अपने जोशीले और विचारोत्तेजक संबोधन में मौलाना बिलाल थानवी ने कहा कि आज मुस्लिम समाज की गिरावट का सबसे बड़ा कारण इल्म और मक्तब से दूरी है। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जिस क़ौम ने ज्ञान से मुंह मोड़ा, वह हमेशा ज़वाल का शिकार हुई। मौलाना थानवी ने कहा कि दुनिया की बड़ी-बड़ी ताक़तें तमाम संसाधनों के बावजूद फ़िलिस्तीनी अवाम को पूरी तरह समाप्त नहीं कर सकीं, क्योंकि वे कुरआन से जुड़े हुए हैं और वहां बड़ी संख्या में हाफ़िज़-ए-कुरआन मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि यह कोई कहानी नहीं, बल्कि हकीकत है कि कहीं एक मां ने पूरे घर को कुरआन की रोशनी से भर दिया और कहीं एक पिता ने अपने घर को दीन का क़िला बना दिया। सात-सात साल के बच्चे कुरआन हिफ़्ज़ कर रहे हैं और उनकी तिलावत दिलों को झकझोर देती है। उन्होंने लोगों को नसीहत करते हुए कहा कि हर मुसलमान को अपनी ज़िंदगी रसूल-ए-अकरम (स०) की शिक्षाओं के अनुसार ढालनी चाहिए और कम से कम उन चार अच्छाइयों में से किसी एक को ज़रूर अपनाना चाहिए, जिनकी तालीम नबी ने दी है।

कार्यक्रम के अंत में उन्होंने कहा कि आज की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी यह है कि अपनी आने वाली नस्लों को दीनि तालीम से जोड़ें और कुरआन से मजबूत रिश्ता कायम करें, क्योंकि यही दुनिया और आख़िरत में कामयाबी का एकमात्र रास्ता है।

इस अवसर पर मदरसे के मोहतमिम मौलाना गुलज़ार क़ासमी ने अतिथियों, उलेमा-ए-कराम, अभिभावकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्था का उद्देश्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि अच्छे चरित्र का निर्माण करना है, और यह सफलता अल्लाह के फ़ज़्ल और अहले-ख़ैर के सहयोग का परिणाम है।

समारोह के दौरान नौ हाफ़िज़ छात्रों की दस्तारबंदी की गई, जबकि 16 छात्र-छात्राओं ने नाज़िरा कुरआन मुकम्मल किया। दारुल उलूम देवबंद के मौलाना मुहम्मद यामीन क़ासमी सहित अन्य उलेमा ने भी संबोधन किया। बच्चों द्वारा प्रस्तुत दीनि और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में लोगों ने शिरकत कर आयोजन को यादगार बना दिया।

विशेष रूप से क़ारी अब्बास, मुफ्ती ऐनुद्दीन, मुफ्ती नईम, मौलाना मुज़म्मिल, मौलाना ज़ैनुद्दीन, मौलाना अतीक़ुर्रहमान, क़ारी नसीर, मुफ्ती शाहनवाज़, क़ारी नज़र मुहम्मद, मौलाना मुहम्मद अहमद, मौलाना मुहम्मद सुफ़यान मिफ़्ताही, क़ारी मुहम्मद साजिद ख़ान, डॉ. अज़मतुल्लाह ख़ान, क़ारी इनाम और मौलाना मुहम्मद हारिस ख़ान क़ारी मुहम्मद फरीद, शुऐब फरीदी की मौजूदगी उल्लेखनीय रही।

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