गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 21 और 22 अगस्त को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी का दौरा करेंगे। इस दौरान वे सीमा सुरक्षा पर एक हाई-लेवल मीटिंग की अध्यक्षता करेंगे और इससे जुड़े कई प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन करेंगे। इस दो-दिन के दौरे का मकसद सीमा प्रबंधन और तैयारी में शामिल सुरक्षा बलों और एजेंसियों के बीच तालमेल को बेहतर बनाना है। शाह भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई पहलों का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे।
इस दौरे के दौरान, गृह मंत्री सशस्त्र सीमा बल (SSB) के जवानों से बातचीत करेंगे। यह बल भारत-नेपाल सीमा के 1,751 किलोमीटर और भारत-भूटान सीमा के 699 किलोमीटर हिस्से की सुरक्षा करता है। इस बातचीत से ऑपरेशन से जुड़ी चुनौतियों, सीमा प्रबंधन और इलाके में तैनात सुरक्षा बलों की तैयारियों पर चर्चा करने का मौका मिलेगा। सिलीगुड़ी एक रणनीतिक रूप से अहम कॉरिडोर है, जिसे अक्सर ‘चिकन नेक’ कहा जाता है। इसका आकार लगभग 60 किलोमीटर गुणा 22 किलोमीटर है। यह भारत के आठ पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। इसके दक्षिण और पश्चिम में बांग्लादेश, उत्तर में तिब्बत (चीन) और पड़ोसी देश नेपाल, बांग्लादेश और भूटान हैं।
इसके अलावा, शाह संसद द्वारा बनाए गए तीन नए आपराधिक कानूनों पर एक प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे। ये कानून औपनिवेशिक दौर के आपराधिक न्याय ढांचे की जगह लेंगे: भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम। ये कानून 1 जुलाई, 2024 से लागू हुए हैं। प्रदर्शनी में इन कानूनों की मुख्य बातों और भारत के आपराधिक न्याय तंत्र को बदलने में इनके महत्व पर प्रकाश डाला जाएगा। सरकार नागरिकों, कानून लागू करने वाली एजेंसियों और अन्य संबंधित लोगों को नए कानूनों के बारे में जानकारी देने के लिए देश भर में जागरूकता कार्यक्रम चला रही है।22 अगस्त की सुबह, शाह सिलीगुड़ी में बॉर्डर सिक्योरिटी मीटिंग की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में सुरक्षा बलों के बीच बेहतर तालमेल, सुरक्षा तैयारियों का जायजा लेने और चल रहे इंफ्रास्ट्रक्चर व सुरक्षा से जुड़े कामों की समीक्षा करने पर ध्यान दिया जाएगा। यह दौरा इस बात को दिखाता है कि सरकार भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को सुरक्षित करने पर लगातार ज़ोर दे रही है। इसके लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, कड़ी निगरानी, सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है।






