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एमसीएफ टेंडर में मनमानी पर हाईकोर्ट ने अभियंता को किया तलब

सबसे कम मूल्य की बोली वाली कंपनी के स्थान पर तीसरे स्थान की कंपनी को दिया गया वर्क चार्ज, मोहित एंटरप्राइजेज की याचिका पर न्यायाधीशों ने मुख्य तकनीकी अभियंता को किया तलब

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Tuesday, December 30, 2025

High Court summons engineer over MCF tender arbitrariness

रायबरेली ब्यूरो। लालगंज स्थित आधुनिक रेल डिब्बा कारखाना(एमसीएफ) की निविदा प्रक्रिया में जिम्मेदारों द्वारा कथित मनमानी का प्रकरण इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ तक पहुंच गया। जिसमें लखनऊ खंडपीठ के विद्वान न्यायाधीशों शेखर बी सर्राफ व मंजीव शुक्ला द्वारा आधुनिक रेल डिब्बा कारखाना के मुख्य तकनीकी अभियंता को जरूरी दस्तावेजों के साथ पीठ के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।

जानकारी के अनुसार मोहित एंटरप्राइजेज ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में एक याचिका दायर की जिसमें एक ऑनलाइन निविदा के संबंध में बताया गया कि 14 अगस्त को निविदा के लिए ऑनलाइन आवेदन जारी हुआ था जिसमें मोहित एंटरप्राइजेज ने सर्वाधिक कम मूल्य की बोली लगाकर प्रथम स्थान हासिल किया। परंतु आधुनिक रेल डिब्बा कारखाना के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा बिना कारण बताएं उनकी निविदा को अस्वीकृत कर दिया तथा तीसरे स्थान पर रही कंपनी को वर्क चार्ज दे दिया गया।

इसी को लेकर मोहित एंटरप्राइजेज ने अधिवक्ता उमेश चंद्र शुक्ला के द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में याचिका दायर की। मामले में अधिवक्ता की दलीलों से हाई कोर्ट के विद्वान न्यायाधीश संतुष्ट दिखे तथा आधुनिक रेल डिब्बा कारखाना के मुख्य तकनीकी अभियंता को आगामी 6 जनवरी को पीठ के समक्ष सभी दस्तावेज के साथ उपस्थित होने का आदेश दिया है।

मोहित इंटरप्राइजेज के अधिवक्ता के अनुसार इससे पूर्व भी टेंडरों में मोहित इंटरप्राइजेज के बोलियों के साथ इसी प्रकार किया जा चुका है। एक अन्य निविदा प्रक्रिया में टॉप की 6 कंपनियों को छोड़ कर सातवें स्थान पर रही कंपनी को वर्क चार्ज दे दिया गया था। उस प्रकरण में भी हाई कोर्ट ने वर्क चार्ज पर रोक लगाते हुए आधुनिक रेल डिब्बा कारखाना से जवाब तलब किया था।

मोहित एंटरप्राइजेज द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार इस मामले में बिना कोई स्पष्ट कारण के निविदा बोलियां को नजरअंदाज कर मनचाहे कंपनियों को टेंडर दे दिए गए हैं जबकि नियमावली के अनुसार जो कंपनी सबसे कम मूल्य पर कार्य करने को तैयार होती है उसी को टेंडर अलॉट होता है। लेकिन आधुनिक रेल डिब्बा कारखाना में कई मामलों में अधिक मूल्य पर कार्य करने वाली कंपनी को वर्क चार्ज दिया गया है। अब देखना होगा कि उच्च न्यायालय के समक्ष एमसीएफ के अभियंता की दलीलों से न्यायाधीश संतुष्ट होते है या नही।

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