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बाबा साहेब की विचाराधारा को पर्दे के पीछे डाला: राव कैसर सलीम

अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति की आवाज संसद तक पहुंचाएंगे, बोले, जब सड़क सूनी हो जाती है तो सत्ता बेलगाम होती है

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Thursday, January 8, 2026

Baba Saheb's ideology was put behind the curtain: Rao Kaiser Saleem

सहारनपुर। लंबे समय तक राष्ट्रीय लोकदल के जिलाध्यक्ष रहे राव कैसर सलीम ने आजाद समाज पार्टी (कांशीराम ) का दो दिन पूर्व दामन थाम लिया था। उन्होंने कहा कि जब रालोद सत्ता में आई है तो संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की विचाराधारा को पर्दे के पीछे डाल दिया गया है। उनकी पार्टी अंतिम छोर पर बैठे की व्यक्ति की आवाज को सड़क से संसद तक पहुंचाने का काम करेगी। । बोले, कि जब सड़क सूनी हो जाती है तो सत्ता बेलगाम हो जाती है।

रोटरी क्लब सभागार में पत्रकार वार्ता के दौरान राव कैसर सलीम ने कहा कि दो दिन पहले उन्होंने दिल्ली में आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर के समक्ष आसपा की सदस्यता ग्रहण की है। उन्होंने अपने जीवन का लंबा बहुमूल्य समय रालोद में दिया है, लेकिन राष्ट्रीय लोकदल जब से भाजपा के साथ मिलकर गठबंधन के बाद सत्ता में आई है तब से संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की विचाराधारा को पर्दे को पीछे डाल दिया गया है।

लोहियावादी विचाराधारा है कि जब सड़क सूनी हो जाती है तो सत्ता बेलगाम हो जाती है। उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में आसपा के बिना सरकार बनने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि दलित, अल्पसंख्यकों, पिछड़े, वंचितों की आवाज को वह सड़क से लेकर संसद तक पहुंचाने का काम करेंगे। उनका मकसद है कि पीडि़त लोगों के हाथों को मजबूत करना है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर के हाथों को भी मजबूत किया जाएगा।

चंद्रशेखर गरीबों और मजलूमों की आवाज को संसद में उठा रहे हैं। एक दिन चंद्रशेखर देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस मौके पर आसपास के जिलाध्यक्ष सचिन खुराना ने राव कैसर सलीम और उनके समर्थकों का आसपा में शामिल होने पर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर सर्व समाज की लड़ाई लड़ रहे हैं। वह जनता के हक की बात करते हैं। आसपा का परिवार लगातार बढ़ता जा रहा है। आसपा के बिना कोई सरकार नहीं बनेगी। विधानसभा चुनाव में प्रदेश में सभी सीटों पर पार्टी चुनाव लड़ेगी। इस दौरान रामदास, नानौता चेयरमैन पति अफजाल खान, राव फरमान, जान मोहम्मद, आरिफ मुखिया, अखलाक ठेकेदार, शाकिर आदि मौजूद रहे।

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