सोमेन्द्र पटेल, महराजगंज रायबरेली।
चंदापुर थाना एक बार फिर विवादों के घेरे में है। ताजा मामला एक पत्रकार को धमकी देने का है, जहां थानेदार अरविंद सिंह ने पत्रकार अंजनी कुमार से कथित रूप से कहा – “पहले अपनी इमेज सुधारो, नहीं तो मैं तुझे ठीक कर दूंगा।” पत्रकार ने इस संबंध में क्षेत्राधिकारी (CO) प्रदीप कुमार को लिखित शिकायत सौंपते हुए थानेदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
पत्रकार अंजनी कुमार, निवासी डोमापुर, 11 अगस्त 2025 को अपने गांव की एक महिला के साथ थाने पहुंचे थे।
महिला के पति की कुछ समय पूर्व दिल्ली में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी और उसे लगातार फोन पर धमकियां मिल रही थीं। इसी मामले की तहरीर देने वे चंदापुर थाना पहुंचे थे लेकिन वहां मौजूद थानेदार अरविंद सिंह ने न सिर्फ तहरीर लेने से इनकार किया बल्कि पत्रकार को देख कर कथित तौर पर अभद्र भाषा का प्रयोग किया।
“लामी कांड में फंसा दूंगा” – थानेदार की धमकी? पत्रकार का आरोप है कि थानेदार ने धमकी भरे लहजे में कहा – “लामी कांड में अभी बहुत लोग अज्ञात हैं, तुम्हें भी फंसा दूंगा।” ज्ञात हो कि लामी गांव में कुछ माह पूर्व एक जघन्य हत्याकांड हुआ था, जिसकी जांच अब तक अधूरी है और कई नाम अब तक सामने नहीं आए हैं पत्रकार को इस केस में फंसाने की धमकी को लेकर अब पुलिस कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शिवगढ़ में भी थे विवादों में थानेदार अरविंद सिंह पूर्व में शिवगढ़ थाना प्रभारी रह चुके हैं, जहां पर भी उनकी कार्यशैली को लेकर लगातार शिकायतें मिलती रही थीं वहां भी उन्हें अभद्रता और बदसलूकी के लिए जाना जाता था। अब जब से उन्होंने चंदापुर थाने की कमान संभाली है, आम ग्रामीण, खासतौर पर महिलाएं, बिना जनप्रतिनिधि या समाजसेवी के थाने जाने से डरते हैं।
“खुद की छवि दागदार, दूसरों को इमेज सुधारने की नसीहत”
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिस पुलिस अधिकारी की खुद की छवि विवादों से घिरी हो, वह दूसरों को ‘इमेज सुधारने’ की सलाह कैसे दे सकता है पत्रकार अंजनी कुमार ने अपनी तहरीर में उल्लेख किया है कि इस घटना से उन्हें मानसिक और सामाजिक क्षति हुई है और अधिकारियों से जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है।
एक ओर लामी केस अधूरा, दूसरी ओर पत्रकार को धमकी एक तरफ जहां पुलिस लामी हत्याकांड की जांच में कोई खास प्रगति नहीं कर पाई है, वहीं एक पत्रकार को इस केस में फंसाने की धमकी थानेदार की खीझ को दर्शाती है। यह कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है कि पुलिस पीड़ित की सुनवाई की बजाय, धमकी और दामन का सहारा ले रही है।







