पुलकित दास महंत प्रदेश स्टेट प्रभारी छत्तीसगढ़ दैनिक अयोध्या टाइम्स समाचार पत्र
- कर्नाटक और महाराष्ट्र के तीन मामलों में 162149 रुपये की ऑनलाइन ठगी का खुलासा
- म्यूल खाता मामले में एक बैंक कर्मचारी भी गिरफ्तार
- कमीशन के लालच में खुलवाए जाते थे बैंक खाते, साइबर ठगों तक पहुंचाए जाते थे खाते
- दूसरे राज्यों के साइबर ठगी गिरोहों को उपलब्ध कराए जाते थे खाताधारकों के खाते
- म्यूल खाता प्रकरण में जांच तेज, कई और लोगों की गिरफ्तारी की संभावना
पुलिस मुख्यालय रायपुर के निर्देश पर साइबर थाना जांजगीर -चांपा ने म्यूल खातों के जरिए देशभर में साइबर ठगी करने वाले गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 05 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया।
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने कमीशन के लालच में अपने नाम से बैंक खाते खुलवाकर साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए, जिनका उपयोग विभिन्न राज्यों में ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के लिए किया गया।
समन्वय पोर्टल से प्राप्त इनपुट के आधार पर साइबर थाना पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों एवं बैंकिंग ट्रांजेक्शन की गहन जांच की। विवेचना में पता चला कि कर्नाटक एवं महाराष्ट्र के तीन अलग-अलग साइबर फ्रॉड मामलों में कुल लगभग 162149/ रुपये की ठगी की गई थी और यह राशि आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए म्यूल खातों में ट्रांसफर हुई थी।
आरोपी गिरफ्तार
- हरिशंकर श्रीवास (48 वर्ष), निवासी डोंगाघाट चौक, तपसीद्वार, चांपा
- अनिल नामदेव उर्फ चेतन (33 वर्ष), निवासी महादेव घाट, हटवारा चौक, चांपा
- राजेश सोनी उर्फ रिंकु सोनी (30 वर्ष), निवासी धोबीपारा, चांपा
- संदीप सिंह ठाकुर (36 वर्ष), निवासी परशुराम चौक, चांपा
- कमल विरानी (38 वर्ष), निवासी बरपाली चौक, चांपा पूछताछ में हुआ बड़ा खुलासा
पुलिस पूछताछ में हरिशंकर श्रीवास ने बताया कि अनिल नामदेव और राजेश सोनी ने कमीशन का लालच देकर उससे बैंक खाता खुलवाया था। आगे की जांच में यह भी सामने आया कि संदीप सिंह ठाकुर और कमल विरानी ने भी अपने तथा अन्य लोगों के बैंक खाते खुलवाकर गिरोह के सदस्यों को उपलब्ध कराए। इन खातों के माध्यम से साइबर ठग देश के विभिन्न राज्यों में ऑनलाइन धोखाधड़ी की रकम मंगाते थे।
क्या होता है म्यूल अकाउंट?
म्यूल अकाउंट वह बैंक खाता होता है जिसे कोई व्यक्ति कमीशन या लालच में साइबर अपराधियों को उपयोग के लिए उपलब्ध करा देता है। ऐसे खातों के जरिए ठगी की रकम इधर- उधर ट्रांसफर की जाती है, जिससे अपराधियों तक पहुंचना कठिन हो जाता है। कानून की नजर में ऐसा खाता उपलब्ध कराने वाला व्यक्ति भी अपराध में सहभागी माना जाता है।
साइबर थाना की आमजन से अपील
साइबर थाना जांजगीर-चांपा ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी लालच में आकर अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, ओटीपी, पासवर्ड या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को न दें। म्यूल खाता उपलब्ध कराना भी दंडनीय अपराध है और इसमें संलिप्त पाए जाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यदि किसी के साथ साइबर ठगी होती है, तो तुरंत हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें तथा राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। समय पर शिकायत करने से ठगी गई राशि को रोकने या वापस दिलाने की संभावना बढ़ जाती है।
उपरोक्त कार्यवाही में निरीक्षक भास्कर शर्मा प्रभारी सायबर थाना, ASI विवेक सिंह, प्रधान आरक्षक मनोज तिग्गा एवं सायबर टीम का सराहनीय योगदान रहा।






