बड़ी खबर: आरटीआई कार्यकर्ता को फंसाने के लिए 'गाय तस्करी' का झूठा आरोप, राष्ट्रपति से गुहार - आरटीआई कार्यकर्ता की अपील: 'हीना चाइल्ड क्लिनिक' की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने से क्यों कतरा रहा स्वास्थ्य विभाग? - इंस्टाग्राम विवाद में युवक को तमंचे सहित गिरफ्तार - किसना डायमंड एंड गोल्ड ज्वेलरी ने उत्तर प्रदेश के पडरौना में खोला अपना एक्सक्लूसिव शोरूम राज्य में ब्रांड का 29वां एक्सक्लूसिव शोरूम लॉन्च - पोक्सो मामले में दोषी को आजीवन कारावास, अदालत ने लगाया 1.75 लाख का अर्थदंडबड़ी खबर: आरटीआई कार्यकर्ता को फंसाने के लिए 'गाय तस्करी' का झूठा आरोप, राष्ट्रपति से गुहार - आरटीआई कार्यकर्ता की अपील: 'हीना चाइल्ड क्लिनिक' की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने से क्यों कतरा रहा स्वास्थ्य विभाग? - इंस्टाग्राम विवाद में युवक को तमंचे सहित गिरफ्तार - किसना डायमंड एंड गोल्ड ज्वेलरी ने उत्तर प्रदेश के पडरौना में खोला अपना एक्सक्लूसिव शोरूम राज्य में ब्रांड का 29वां एक्सक्लूसिव शोरूम लॉन्च - पोक्सो मामले में दोषी को आजीवन कारावास, अदालत ने लगाया 1.75 लाख का अर्थदंड

आरटीआई कार्यकर्ता की अपील: ‘हीना चाइल्ड क्लिनिक’ की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने से क्यों कतरा रहा स्वास्थ्य विभाग?

"आरटीआई कानून क्या कहता है?" - सार्वजनिक दायित्व के तहत की गई कार्यवाही व्यक्तिगत सूचना नहीं हो सकती।

EDITED BY: Ground Reporter

UPDATED: Thursday, May 14, 2026

मिर्जापुर ब्यूरो। जनपद के स्वास्थ्य विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरटीआई कार्यकर्ता और आरटीआई एसोसिएशन के जिला उपाध्यक्ष नितेश उपाध्याय द्वारा एक निजी क्लिनिक के विरुद्ध मांगी गई शिकायतों और जांच की जानकारी को स्वास्थ्य विभाग ने “व्यक्तिगत सूचना” बताकर दबाने का प्रयास किया है। अब यह मामला प्रथम अपील अधिकारी (अपर निदेशक, स्वास्थ्य) की चौखट पर पहुँच गया है।

धारा 8(1)(j) की आड़ में छुपाया जा रहा सच?

​मामला शहर के ‘हीना चाइल्ड क्लिनिक’ (कटरा कोतवाली) से जुड़ा है। नितेश उपाध्याय ने आरटीआई के माध्यम से मुख्यमंत्री पोर्टल पर इस क्लिनिक के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों और उन पर विभाग द्वारा की गई कार्यवाही की प्रमाणित प्रतियां मांगी थीं। इसके जवाब में उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अवधेश कुमार ने आरटीआई की धारा 8(1)(j) का हवाला देते हुए सूचना देने से साफ इंकार कर दिया। विभाग का तर्क है कि यह किसी की निजी जानकारी है, जबकि कानूनन किसी सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थान के विरुद्ध हुई प्रशासनिक कार्यवाही जनहित का विषय होती है।

प्रशासनिक जवाबदेही पर प्रहार

​अपीलकर्ता नितेश उपाध्याय का तर्क है कि किसी क्लिनिक के विरुद्ध जांच रिपोर्ट “निजी जानकारी” कैसे हो सकती है? यदि किसी संस्थान के विरुद्ध शिकायतें प्राप्त हुई हैं और विभाग ने उन पर कार्यवाही की है, तो आम जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि वह संस्थान मानकों पर खरा उतरता है या नहीं। उन्होंने अपनी प्रथम अपील में आरोप लगाया है कि जन सूचना अधिकारी तथ्यों की गलत व्याख्या कर रहे हैं और दोषी संस्थान को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।

प्रथम अपील दायर: अब एडी (AD) मिर्जापुर करेंगे फैसला

​सूचना देने से इंकार किए जाने के बाद नितेश उपाध्याय ने 13 मई 2026 को चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण निदेशालय के प्रथम अपील अधिकारी (एडी, मिर्जापुर) के समक्ष अपील दायर कर दी है। अपील में मांग की गई है कि सीएमओ कार्यालय के भ्रामक उत्तर को निरस्त कर तत्काल समस्त जांच आख्या और शिकायतों का विवरण उपलब्ध कराया जाए।

जनता में चर्चा का विषय

​स्वास्थ्य विभाग के इस रवैये से आरटीआई कार्यकर्ताओं और आम जनता में रोष है। चर्चा है कि क्या स्वास्थ्य विभाग निजी क्लिनिकों के रसूख के आगे घुटने टेक रहा है? फिलहाल सबकी निगाहें अपर निदेशक (एडी) मिर्जापुर के फैसले पर टिकी हैं कि क्या वे विभाग में पारदर्शिता बहाल करेंगे या सूचना दबाने के इस खेल को जारी रहने देंगे।

खबरें और भी

उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिले