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पोक्सो मामले में दोषी को आजीवन कारावास, अदालत ने लगाया 1.75 लाख का अर्थदंड

पीड़िता को पांच लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Wednesday, May 13, 2026

धर्मेन्द्र सिंह ब्यूरो किशनगंज, दैनिक अयोध्या टाइम्स

किशनगंज व्यवहार न्यायालय स्थित अनन्य विशेष न्यायाधीश पोक्सो अधिनियम दीप चंद पाण्डेय की अदालत ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में नाबालिग के साथ दुष्कर्म के मामले में दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने बहादुरगंज थाना क्षेत्र के भाटाबाड़ी निवासी शमशेर आलम उर्फ शम्स आलम को पोक्सो अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं में दोषी पाते हुए यह सजा सुनाई है।अदालत ने आरोपी को पोक्सो अधिनियम के तहत पीड़िता के साथ दुष्कर्म करने का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा दी। इसके अलावा अन्य धाराओं में भी सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है।

अदालत ने आरोपी पर एक लाख 75 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। आदेश के अनुसार अर्थदंड की पूरी राशि पीड़िता को दी जाएगी। यदि आरोपी अर्थदंड की राशि अदा नहीं करता है तो उसे अतिरिक्त छह माह की सजा भुगतनी होगी।

मामले की सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक पोक्सो अधिनियम मनीष कुमार साह ने अदालत में सजा के बिंदु पर जोरदार बहस करते हुए आरोपी के खिलाफ ठोस तथ्य एवं साक्ष्य प्रस्तुत किए।अभियोजन पक्ष की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया। जानकारी के अनुसार, बहादुरगंज थाना कांड संख्या 120/23 एवं पोक्सो वाद संख्या 21/23 के तहत वर्ष 2023 में नाबालिग के साथ दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया गया था। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच कर आरोपी के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र समर्पित किया था। इसके बाद से ही मामले की सुनवाई अनन्य विशेष न्यायाधीश पोक्सो अधिनियम की अदालत में चल रही थी। सुनवाई के दौरान पीड़िता, गवाहों और अनुसंधान से जुड़े विभिन्न साक्ष्यों को अदालत में प्रस्तुत किया गया। अदालत ने सभी तथ्यों और गवाहों के बयान पर विचार करने के बाद आरोपी को दोषी पाया और कड़ी सजा सुनाई।

वहीं अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि पीड़िता को पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत पांच लाख रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराई जाए। अदालत के इस फैसले को महिला एवं बाल सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फैसले के बाद न्यायालय परिसर में मौजूद लोगों ने कहा कि इस तरह के मामलों में त्वरित सुनवाई और कठोर सजा से समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा तथा महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ अपराध करने वालों में कानून का भय पैदा होगा।

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