महिला शिक्षकों के हितों के प्रति पूर्ण समर्पित लगातार चौथी बार जिलाध्यक्ष बनीं अनीता तिवारी । - धुरिया पलिया सरकारी स्कूल में शिक्षक न पहुंचने से बच्चों का भविष्य हो रहा खिलवाड़ - स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पूरनपुर नगर में संचालित अल्ट्रासाउंड सेंटरों व पैथोलॉजी लैबों पर छापेमारी। - बेमौसम बारिश से किसानों की फसलें बर्बाद, खेतों में भरा पानी - महंगी किताबों और ड्रेस की शिकायत पर सेंट जेवियर्स स्कूल में डीआईओएस की छापेमारीमहिला शिक्षकों के हितों के प्रति पूर्ण समर्पित लगातार चौथी बार जिलाध्यक्ष बनीं अनीता तिवारी । - धुरिया पलिया सरकारी स्कूल में शिक्षक न पहुंचने से बच्चों का भविष्य हो रहा खिलवाड़ - स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पूरनपुर नगर में संचालित अल्ट्रासाउंड सेंटरों व पैथोलॉजी लैबों पर छापेमारी। - बेमौसम बारिश से किसानों की फसलें बर्बाद, खेतों में भरा पानी - महंगी किताबों और ड्रेस की शिकायत पर सेंट जेवियर्स स्कूल में डीआईओएस की छापेमारी

धुरिया पलिया सरकारी स्कूल में शिक्षक न पहुंचने से बच्चों का भविष्य हो रहा खिलवाड़

ग्रामीणों के आरोपों से शिक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय के इंचार्ज अथवा प्रधानाध्यापक को समय की कोई पाबंदी नहीं है

EDITED BY: DAT ब्यूरो चीफ

UPDATED: Thursday, April 9, 2026


पीलीभीत। परिषदीय स्कूलों में सरकार द्वारा दी जाने वाली सरकारी योजनाओं से खिलवाड़ करने का मामला सामने आया है। जहां क्षेत्र के धुरिया पलिया स्थिति परिषदीय स्कूल में इंचार्ज व प्रधानाध्यापक की मनमानी का मामला उजागर हुई है। वहीं विकास खण्ड के परिषदीय स्कूलों में बर्तमान में छात्र छात्राओं की दी जाने वाली खाद्य वस्तुओं पर सरकारी अध्यापकों व प्रधानाचार्य की गहरी नज़र बैठ गई है।

जहां उनके पेट के साथ कटौती कर शिक्षक लोग भी भ्रष्टाचार की जद में धंसने को मजबूर हो गए हैं। वहीं ग्रामीणों के आरोपों से शिक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय के इंचार्ज अथवा प्रधानाध्यापक को समय की कोई पाबंदी नहीं है और न ही उनको जिम्मेदारी का कोई एहसास है। ग्रामीणों का आरोप है कि अध्यापक समय से पहले ही विद्यालय बंद करके चले जाने का मामला गंभीर बना हुआ है। जिससे बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।सरकार द्वारा परिषदीय विद्यालयों में बुधवार के दिन बच्चों को फल और दूध की व्यवस्था की गई है। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां सिर्फ फल ही दिया जाता है और बच्चों को पीने के लिए दूध कभी नहीं दिया गया।

इससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि स्कूल के इंचार्ज तथा अध्यापक की लापरवाही के चलते शिक्षण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और बच्चों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस पूरे मामले में संबंधित अधिकारियों की चुप्पी क्यों है? क्या उनकी जानकारी में यह सब हो रहा है या फिर उनके संरक्षण में यह खेल चल रहा है? अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

खबरें और भी

उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिले