हैरान करने वाली 'लूट': सोनभद्र में कक्षा 2 की किताबों का दाम ₹7,000 के पार, सोशल मीडिया पर वायरल हुई पर्ची - ओबरा तहसील पर आदिवासियों का 'हल्ला बोल', वन विभाग और पुलिस पर उत्पीड़न का आरोप - शिक्षा के नाम पर 'लूट' के खिलाफ सपा का हल्ला बोल, तहसील दिवस में सौंपा ज्ञापन - घायल हूं, इसलिए घातक हूं - Raghav Chadha - मुख्यमंत्री का बड़ा फैसला: सोनभद्र में भी मजबूत होगा 'सिविल डिफेंस' का सुरक्षा कवचहैरान करने वाली 'लूट': सोनभद्र में कक्षा 2 की किताबों का दाम ₹7,000 के पार, सोशल मीडिया पर वायरल हुई पर्ची - ओबरा तहसील पर आदिवासियों का 'हल्ला बोल', वन विभाग और पुलिस पर उत्पीड़न का आरोप - शिक्षा के नाम पर 'लूट' के खिलाफ सपा का हल्ला बोल, तहसील दिवस में सौंपा ज्ञापन - घायल हूं, इसलिए घातक हूं - Raghav Chadha - मुख्यमंत्री का बड़ा फैसला: सोनभद्र में भी मजबूत होगा 'सिविल डिफेंस' का सुरक्षा कवच

हैरान करने वाली ‘लूट’: सोनभद्र में कक्षा 2 की किताबों का दाम ₹7,000 के पार, सोशल मीडिया पर वायरल हुई पर्ची

अभिभावकों में भारी आक्रोश; प्राइवेट स्कूलों और बुक सेलर्स के गठजोड़ पर उठे सवाल, बनारस-प्रयागराज भी हुए फेल

EDITED BY: Ground Reporter

UPDATED: Saturday, April 4, 2026

रॉबर्ट्सगंज (सोनभद्र)अमान खान ब्यूरो चीफ। शिक्षा अब सेवा नहीं, बल्कि एक ‘मुनाफे वाला धंधा’ बन चुकी है, इसकी एक चौंकाने वाली बानगी सोनभद्र जिला मुख्यालय में देखने को मिली है। सोशल मीडिया पर ‘रॉयल बाजार’ नामक दुकान की एक पर्ची (Cash Memo) तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें कक्षा 2 की किताबों की कीमत कुल ₹7,162 (छूट के बाद ₹6,628) दर्शाई गई है। इस बिल को देखकर आम जनता और अभिभावकों के होश उड़े हुए हैं।

पर्ची ने खोली ‘सिंडिकेट’ की पोल:

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘नमस्ते सोनभद्र UP-64’ पर जारी इस पोस्ट ने जिले की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि कक्षा 2 के बच्चे की किताबों में ऐसा क्या लिखा है कि उसकी कीमत सात हजार रुपये के करीब पहुँच गई?

  • बड़ा सवाल: क्या इन किताबों में सोने के अक्षर जड़े हैं?
  • गठजोड़ का आरोप: वायरल बिल में ‘जयपुरिया स्कूल’ का नाम भी दर्ज है, जो इस बात की पुष्टि करता है कि प्राइवेट स्कूलों ने अपने मनमुताबिक प्रकाशकों की किताबें निर्धारित कर रखी हैं, जिन्हें ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है।

अभिभावकों की टूटी कमर:

सोनभद्र के मध्यमवर्गीय और गरीब अभिभावकों के लिए यह कीमतें किसी बड़े झटके से कम नहीं हैं। सोशल मीडिया पर लोग कमेंट्स के जरिए अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि बड़े शहरों जैसे बनारस और प्रयागराज में भी शिक्षा इतनी महंगी नहीं है, जितनी सोनभद्र के कुछ निजी स्कूलों ने बना दी है।

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