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चोरों के हौंसले बुलंद आए दिन ट्यूबवेल पर रखें ट्रांसफार्मरों को बना रहे अपना निशाना

अब चोरों ने किसानों की इस मजबूरी को ही निशाना बना लिया है। डिलारी थाना क्षेत्र में आए दिन ट्यूबवेल पर लगे ट्रांसफार्मरों की चोरी हो रही है,

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Sunday, June 7, 2026

मुरादाबाद,डिलारी – खेत की फसल के लिए पानी जरूरी है, और पानी के लिए ट्यूबवेल। लेकिन अब चोरों ने किसानों की इस मजबूरी को ही निशाना बना लिया है। डिलारी थाना क्षेत्र में आए दिन ट्यूबवेल पर लगे ट्रांसफार्मरों की चोरी हो रही है, जिससे किसानों की फसल बर्बाद होने के कगार पर पहुंच गई है।

गांव सरकड़ा बिश्नोई के किसान विकास कुमार के साथ जो हुआ, वो आज हर किसान की कहानी बन गया है। सुबह 6 बजे खेत पर पानी देने पहुंचे तो देखा कि ट्रांसफार्मर खंभे से नीचे गिरा पड़ा है। अंदर से पीतल, कॉपर और तमाम कीमती सामान गायब। रातभर की मेहनत और हजारों का नुकसान। पुलिस ने शिकायत ले ली है, लेकिन चोर अभी भी पकड़ से बाहर हैं।

ये कोई अकेली घटना नहीं है। नगर पंचायत ढकिया के जंगल में भी पहले ट्रांसफार्मर चोरी की घटनाएं हो चुकी हैं। चोरों का तरीका एक ही है – रात के अंधेरे में ट्यूबवेल पर धावा, ट्रांसफार्मर तोड़ना, और कीमती सामान निकाल ले जाना। किसान सुबह जाकर खाली खोखा देखता है और रोता रह जाता है।

किसानों की दोहरी मार

1. आर्थिक नुकसान: एक ट्रांसफार्मर लाखों का होता है। ऊपर से फसल सूखने का डर अलग।

2. समय की बर्बादी: नया ट्रांसफार्मर लगवाने में हफ्तों लग जाते हैं। तब तक गेहूं, धान, गन्ना सब झुलस जाता है।

चोरों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वो जंगल के सुनसान इलाकों को चुन रहे हैं जहां चौकीदारी नहीं है। बिजली विभाग और पुलिस की पेट्रोलिंग भी नाकाफी साबित हो रही है।

समस्या का‌ समाधान क्या है?

किसानों को अब खुद जागरूक होना पड़ेगा। ट्यूबवेल पर CCTV कैमरा, लोहे का जाल, और रात में चौकीदारी जरूरी हो गई है। पंचायत स्तर पर सामूहिक सुरक्षा कमेटी बनाई जाए। बिजली विभाग को भी चाहिए कि वो ट्रांसफार्मरों को चोरी-रोधी तरीके से लगाए और ग्रामीण इलाकों में गश्त बढ़ाए।

सरकार किसानों को “अन्नदाता” कहती है, लेकिन जब अन्नदाता की फसल ही चोरों की भेंट चढ़ रही हो तो सवाल उठता है – सुरक्षा किसकी जिम्मेदारी है?

अगर चोरों पर जल्द लगाम नहीं लगी, तो डिलारी-ढकिया का हर किसान अपने ट्यूबवेल पर पहरा देने को मजबूर हो जाएगा। और खेत में फसल की जगह सिर्फ चिंता उगेगी।

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