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ओबरा तहसील पर आदिवासियों का ‘हल्ला बोल’, वन विभाग और पुलिस पर उत्पीड़न का आरोप

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के नेतृत्व में प्रदर्शन; तहसीलदार ने वन क्षेत्राधिकारी और कोन इंस्पेक्टर को दिए जाँच के आदेश

EDITED BY: Ground Reporter

UPDATED: Saturday, April 4, 2026

ओबरा (सोनभद्र)अमान खान ब्यूरो चीफ। अपनी पुश्तैनी जमीनों और सिर छिपाने की छत को बचाने के लिए शनिवार को ओबरा तहसील क्षेत्र के आदिवासियों ने हुंकार भरी। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रदेश युवा अध्यक्ष एडवोकेट संतोष कुमार गौतम के नेतृत्व में दर्जनों आदिवासियों ने तहसील भवन के समक्ष ज़ोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने वन विभाग और स्थानीय पुलिस पर प्रताड़ित करने का गंभीर आरोप लगाते हुए न्याय की गुहार लगाई है।

​पुश्तैनी हक और बेदखली का दर्द:

प्रदर्शन में शामिल बडेरा, हर्रा, निगाई और सलैयाडीह के आदिवासियों ने व्यथा सुनाते हुए कहा कि वे अपने बाप-दादा के ज़माने से इन ज़मीनों पर काबिज़ हैं और खेती-बारी कर अपना जीविकोपार्जन कर रहे हैं।

  • ​गंभीर आरोप: ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग और कोन पुलिस द्वारा उन्हें आए दिन हैरान-परेशान किया जा रहा है। आदिवासियों ने कहा कि उनके घर ढहा दिए गए हैं और तैयार फसलों को भी काटने नहीं दिया जा रहा है।
  • ​प्रमुख मांग: प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि वनाधिकार कानून के तहत उनकी ज़मीनों का पट्टा किया जाए और खतौनी में उनके नाम दर्ज किए जाएं।

​तहसीलदार का कड़ा रुख:

मामले की गंभीरता को देखते हुए ओबरा तहसीलदार अंजनी गुप्ता ने तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने वन क्षेत्राधिकारी (रेंजर) और कोन इंस्पेक्टर को निर्देशित किया है कि मामले की गहनता से जाँच कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी पात्र आदिवासी का उत्पीड़न न हो।

​प्रदर्शन में शामिल मुख्य चेहरा:

इस दौरान नगेंदर, मुन्नी, राम दयाल, शिवकुमार, फुलदेवी, प्रभावती, उर्मिला, रामेश्वर, फुलबसिया, रमुनिया देवी और ललिता देवी सहित भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

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