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मेघालय की खुशबू से महका मुंबई

मुंबई में सजा मसालों का महाकुंभ

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Sunday, March 1, 2026

The fragrance of Meghalaya fills Mumbai

मुंबई (अनिल बेदाग) : भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई ने आज पूर्वोत्तर की सुगंध को करीब से महसूस किया। पहली बार आयोजित ‘मेघालय स्पाइस फेस्टिवल’ ने यह स्पष्ट कर दिया कि पहाड़ों की गोद में पले-बढ़े मसाले अब राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों में अपनी मजबूत पहचान बनाने को तैयार हैं। मुंबई में आयोजित इस महोत्सव ने मेघालय को भारत के उभरते ऑर्गेनिक मसाला हब के रूप में प्रभावी ढंग से स्थापित कर दिया।

140 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल—जिसमें किसान, उद्यमी, सहकारी नेता और वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे—सीधे मुंबई पहुंचा। उद्देश्य साफ था: उत्पादक और बाजार के बीच की दूरी खत्म करना। मेघालय सरकार के मुख्य सचिव  डॉ शकील पी अहमद ने अपने संबोधन में राज्य की कृषि परंपरा की प्रामाणिकता को रेखांकित करते हुए कहा, “आप हमारे किसानों से सीधे मिलिए, तब समझ में आएगा कि गुणवत्ता और निष्ठा क्या होती है।

हमारे किसान प्रकृति का सम्मान करते हैं, इसलिए हमारे गांव और नदियां सबसे स्वच्छ हैं।” वहीं कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ विजय कुमार डी ने बताया कि मेघालय की हल्दी अब अमेरिका, मध्य-पूर्व और यूरोप तक पहुंच चुकी है, जबकि अदरक का निर्यात सिंगापुर तक हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा, “हम ऐसे साझेदार चाहते हैं जो सतत कृषि में विश्वास रखते हों और हमारे किसानों को उचित मूल्य दिला सकें।”

इस आयोजन की उपस्थिति में महाराष्ट्र सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव विकास चंद्र रस्तोगी , नेशनल टर्मेरिक बोर्ड की सचिव एन भवानी श्री  और फिक्की के प्रतिनिधि भी शामिल रहे, जिसने इसे नीतिगत और व्यावसायिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण बना दिया। मेघालय सरकार की रणनीति स्पष्ट है—प्रीमियम घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूत पहचान, और उस पहचान का सीधा लाभ किसानों की आय वृद्धि में परिवर्तन। आने वाले महीनों में राज्य की सबसे बड़ी मसाला-प्रसंस्करण इकाई का उद्घाटन इस दिशा में एक और सशक्त कदम होगा।

यह सिर्फ एक फेस्टिवल नहीं, बल्कि एक मार्केट-लिंक मिशन है—जहां खेत से लेकर वैश्विक रिटेल शेल्फ तक की पूरी यात्रा को एक मंच पर साकार होते देखा गया। मुंबई की व्यावसायिक धड़कन और मेघालय की जैविक परंपरा का यह संगम बताता है कि भारत का पूर्वोत्तर अब सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता ही नहीं, बल्कि गुणवत्ता, सततता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का भी प्रतीक बन रहा है। मेघालय स्पाइस फेस्टिवल 2026 ने साबित कर दिया है कि जब नीति, प्रकृति और व्यापार एक साथ आते हैं, तो खुशबू सिर्फ हवा में नहीं—अर्थव्यवस्था में भी फैलती है। 

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