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सोनभद्र में मानवाधिकार एसोसिएशन का विखंडन: जिला सचिव लॉरेंस एंथोनी ने पद और सदस्यता को मारी लात

जिला नेतृत्व पर 'विवादों की फैक्ट्री' होने का आरोप; एंथोनी बोले— "गुटबाजी और सिर-फुटौवल के लिए मेरे पास फालतू समय नहीं"

EDITED BY: Ground Reporter

UPDATED: Wednesday, January 21, 2026

सोनभद्र। जनपद में मानवाधिकारों के संरक्षण का ढोंग रचने वाले संगठन ‘समग्र मानवाधिकार एसोसिएशन’ के परखच्चे उड़ते नजर आ रहे हैं। जिला प्रवक्ता अनवर अंसारी के इस्तीफे से शुरू हुआ विद्रोह अब और उग्र हो गया है। संगठन के जिला सचिव लॉरेंस एंथोनी ने जिला नेतृत्व की कार्यशैली और संगठन में व्याप्त आंतरिक कलह पर गंभीर सवाल उठाते हुए अपने पद और प्राथमिक सदस्यता से सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। एंथोनी के इस कड़े प्रहार ने संगठन के भीतर मचे घमासान को सार्वजनिक कर दिया है।

जिला नेतृत्व की विफलता और आपसी रार:

त्यागपत्र के माध्यम से लॉरेंस एंथोनी ने संगठन के शीर्ष नेतृत्व को आईना दिखाते हुए कहा कि जिला इकाई अब केवल ‘निजी स्वार्थों’ और ‘विवादों का केंद्र’ बनकर रह गई है। उन्होंने तीखे लहजे में कहा, “संगठन के भीतर आए दिन होने वाले बचकाने विवादों और सिर-फुटौवल ने काम करने का माहौल पूरी तरह विषाक्त कर दिया है। जहाँ जिला नेतृत्व ही विवादों को पालने में लगा हो, वहाँ किसी भी स्वाभिमानी कार्यकर्ता का बने रहना असंभव है।”

“मेरा समय विवादों के लिए नहीं”:

एंथोनी ने अपनी व्यस्तता और सिद्धांतों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि उनके पास समाज सेवा के कई महत्वपूर्ण कार्य हैं और वे संगठन के इन अर्थहीन झगड़ों में अपना कीमती समय और ऊर्जा बर्बाद नहीं कर सकते। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जिला नेतृत्व अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन में पूरी तरह नकारा और विफल साबित हुआ है।

अस्तित्व के संकट में संगठन:

एक के बाद एक कद्दावर पदाधिकारियों के इस्तीफों ने जिले में संगठन के वजूद पर सवाल खड़ा कर दिया है। एंथोनी ने साफ कर दिया है कि वे अब किसी भी विवादित ढांचे का हिस्सा रहने के बजाय स्वतंत्र रूप से जनता के अधिकारों की लड़ाई लड़ेंगे। इस सामूहिक पलायन ने साबित कर दिया है कि सोनभद्र में संगठन ताश के पत्तों की तरह ढह चुका है।

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