मनोज कुमार यादव ब्यूरो चीफ
देवरिया। फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत गठित पीएसपी (पेशेंट स्टेक होल्डर प्लेटफार्म) के सदस्य अब बुधवार व शनिवार को जिले में संचालित हो रहे टीका उत्सव में भी अपनी भागीदारी निभाकर छूटे बच्चों का टीकाकरण कराने में सहयोग कर रहे हैं। टीका उत्सव पर टीके से वंचित बच्चों के घरों में जाकर उन्हें बुलावा पर्ची देकर उन्हें टीकाकरण कराने के लिए प्रेरित कर रहे हैं । साथ ही फाइलेरिया बीमारी से बचाव के साथ बच्चों को 12 बीमारियों से बचाने के लिए लगने वाले टीके के बारे में भी जागरूक कर रहे हैं। सत्र पर गर्भवती को सही पोषण के लिए उचित खान-पान की सलाह भी दी जा रही है।
सीएमओ डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जिले के दो ब्लॉक पथरदेवा व भटनी, और भलुअनी ब्लॉक में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर पीएसपी का गठन किया गया है। इसमें सीएचओ, एएनएम, ग्राम प्रधान, संगिनी, आशा, वालेंटियर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, फाइलेरिया मरीज, कोटेदार को सदस्य बनाया गया है। पीएसपी सदस्यों के सहयोग से वेलनेस कैलेंडर, समुदाय में होने वाली जागरूकता गतिविधियों के साथ वीएचएसएनडी सत्रों पर भी फाइलेरिया बीमारी की गंभीरता, लक्षण और बचाव के प्रति जागरूक किया जाता है।

बुधवार व शनिवार को आयोजित होने वाले वीएचएसएनडी (ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता पोषण दिवस) सत्र को टीका उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। जहां सीएचओ, ग्राम प्रधान, एएनएन, आंगनबाडी, वालेंटियर, फाइलेरिया मरीज, कोटेदार टीकाकरण से मना करने वाले परिवारों व टीके से छूटे बच्चों को समझाकर और टीके का महत्व बताकर जागरूक किया जा रहा है और टीकाकरण कराने को राजी किया जा रहा है। सत्र का शुभारम्भ पीएससी सदस्य ग्राम प्रधान द्वारा फीता काटकर किया जा रहा है। इसके साथ ही पीएसपी सदस्यों द्वारा लोगों को बताया जाता है कि फाइलेरिया एक लाइलाज बीमारी है।
फाइलेरिया बीमारी क्यूलेक्स मच्छर फाइलेरिया संक्रमित व्यक्ति को काटने के बाद किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो उसे भी संक्रमित कर देता, लेकिन संक्रमण के लक्षण पांच से 15 वर्ष में उभरकर सामने आते हैं। इससे व्यक्ति के हाथ-पैर में सूजन की शिकायत होती है या फिर अंडकोष में सूजन आ जाती है।महिलाओं को स्तन के आकार में परिवर्तन हो सकता है। शुरुआत में रोग की पहचान होने पर इसे रोका जा सकता है। इस बीमारी से साल में एक बार लगातार पांच साल दवा के सेवन से बचा जा सकता है।





