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सोनभद्र: आदिवासियों की जमीन पर कब्जा करने वालों की अब खैर नहीं, कोर्ट ने दिया FIR का आदेश

- विशेष न्यायाधीश SC/ST एक्ट ने रामपुर बरकोनिया इंस्पेक्टर को दिए कड़े निर्देश - भू-माफियाओं के खिलाफ दर्ज होगा मुकदमा, क्षेत्राधिकारी (CO) करेंगे मामले की विवेचना

EDITED BY: Ground Reporter

UPDATED: Thursday, January 29, 2026

सोनभद्र (ब्यूरो चीफ, अमान खान)। जनपद में आदिवासियों की जमीन हड़पने वाले भू-माफियाओं के खिलाफ न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट आबिद शमीम की अदालत ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए रामपुर बरकोनिया इंस्पेक्टर को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच सीओ स्तर के अधिकारी करेंगे और परिणाम से कोर्ट को अवगत कराएंगे।

■ भू-माफियाओं ने जबरन जोत ली थी आदिवासियों की जमीन

​यह पूरा मामला रामपुर बरकोनिया थाना क्षेत्र के बिरनचुआ ग्राम का है। प्रार्थिया विफनी देवी और रामविलास गोंड ने अधिवक्ता सीपी द्विवेदी एवं आनंद ओझा के माध्यम से कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। आरोप है कि 23 नवंबर 2025 को भू-माफिया कृष्ण कुमार जायसवाल, रीता जायसवाल, सिंघासन, राजू मौर्य और सरोज गुप्ता समेत कई अज्ञात लोग ट्रैक्टर लेकर पहुंचे और आदिवासियों की जमीन पर जबरन सरसों की बुवाई करने लगे।

■ जातिसूचक गालियां और जान से मारने की धमकी

​प्रार्थना पत्र के अनुसार, जब पीड़ित आदिवासियों ने अपनी जमीन जोतने का विरोध किया, तो आरोपियों ने उन्हें जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए भद्दी-भद्दी गालियां दीं। इतना ही नहीं, विरोध करने पर उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई। पीड़ितों का कहना है कि उनके जीवन निर्वहन के लिए वही एकमात्र जमीन सहारा है, जिसे भू-माफिया हड़पना चाहते हैं।

■ पुलिस की निष्क्रियता पर कोर्ट का कड़ा रुख

​पीड़ितों ने बताया कि घटना की सूचना तत्काल थाने पर दी गई और 10 दिसंबर 2025 को रजिस्टर्ड डाक के जरिए एसपी सोनभद्र को भी अवगत कराया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। थक-हारकर पीड़ितों ने न्यायालय की शरण ली। अदालत ने मामले को गंभीर माना और इसे संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखते हुए पुलिस को तत्काल मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू करने का आदेश दिया।

■ न्याय की उम्मीद में आदिवासी परिवार

​अदालत के इस आदेश के बाद अब पुलिस को आरोपियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसना होगा। मामले की विवेचना क्षेत्राधिकारी (CO) द्वारा की जाएगी, जिससे निष्पक्ष जांच की उम्मीद जगी है। इस आदेश के बाद से भू-माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है।

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