सोनभद्र(अमान खान ब्यूरो चीफ)। रिश्तों को कलंकित करने वाले एक मामले में गुरुवार को अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट अमित वीर सिंह की अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने अपनी ही 15 वर्षीय नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म करने वाले सगे पिता को दोषी पाते हुए कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई। यह कारावास दोषी के शेष प्राकृतिक जीवन काल तक रहेगा। इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर 1.50 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
क्या था मामला?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, मामला चोपन थाना क्षेत्र का है। 27 अक्टूबर 2025 को पीड़िता के मामा ने तहरीर देकर बताया था कि उसके जीजा ने ही अप्रैल 2025 में अपनी नाबालिग बेटी के साथ शारीरिक संबंध बनाए थे, जिससे वह गर्भवती हो गई। चोपन पुलिस ने मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की और साक्ष्य मिलने पर न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की। कोर्ट ने 7 जनवरी 2026 को आरोप तय किए थे और महज 36 दिनों के भीतर 9 गवाहों के बयान व सबूतों के आधार पर यह फैसला सुनाया।
पीड़िता को मिलेगा मुआवजा
अदालत ने आदेश दिया है कि अर्थदंड की कुल धनराशि 1.50 लाख रुपये में से 1.20 लाख रुपये पीड़िता को दिए जाएंगे। अर्थदंड न देने की स्थिति में दोषी को 6 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। इस मामले में सरकारी वकील दिनेश प्रसाद अग्रहरि, सत्यप्रकाश त्रिपाठी और नीरज कुमार सिंह ने प्रभावी बहस की।
बॉक्स: पीड़ित किशोरी ने दिया बेटी को जन्म, DNA टेस्ट से हुई पुष्टि
सरकारी वकील दिनेश प्रसाद अग्रहरि ने बताया कि लोकलाज के कारण गर्भपात की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन कोर्ट से अनुमति न मिलने पर पीड़िता को CWC की देखरेख में रखा गया। 13 जनवरी 2026 को पीड़िता ने एक बच्ची को जन्म दिया। DNA टेस्ट में भी आरोपी पिता ही बच्ची का जैविक पिता पाया गया, जिससे अपराध की पुष्टि हुई।







