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ब्रह्मज्ञान से ही सच्ची प्रेमा भक्ति संभव – सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज

श्रद्धा और भक्ति से ओत-प्रोत सत्संग में सतगुरु माता जी ने फरमाया कि परमात्मा से सच्चा प्रेम तभी संभव है जब उसका वास्तविक परिचय हो

EDITED BY: DAT BUREAU

UPDATED: Sunday, February 15, 2026

True love and devotion is possible only through Brahma Gyan - Satguru Mata Sudiksha Ji Maharaj

बागपत : संत निरंकारी मिशन का एक दिवसीय निरंकारी संत समागम सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी की पावन अध्यक्षता में मेरठ के बागपत में भव्य रूप से आयोजित हुआ। समागम में हजारों श्रद्धालु भक्तों ने सहभागिता कर सतगुरु के दिव्य प्रवचनों से अपने जीवन को आध्यात्मिक दिशा प्रदान की।

श्रद्धा और भक्ति से ओत-प्रोत सत्संग में सतगुरु माता जी ने फरमाया कि परमात्मा से सच्चा प्रेम तभी संभव है जब उसका वास्तविक परिचय हो। केवल नाम लेने से नहीं, बल्कि ब्रह्मज्ञान द्वारा परमात्मा को जानकर उसे जीवन में धारण करके ही प्रेमा भक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

सतगुरु माता जी ने उदाहरण सहित समझाया कि परमात्मा एक ही है, चाहे उसे किसी भी नाम से पुकारा जाए। जिस प्रकार एक ही मैदे से अनेक प्रकार के व्यंजन बनते हैं, उसी प्रकार मूल तत्व एक ही रहता है। इसी तरह जल, बर्फ और भाप रूप बदलते हैं, पर उनका तत्व (H₂O) एक ही होता है। वैसे ही समस्त सृष्टि के कण-कण में एक ही निराकार परमात्मा विद्यमान है।

सतगुरु माता जी ने कहा कि मनुष्य जीवन अत्यंत अनमोल है क्योंकि इसी में परमात्मा की प्राप्ति संभव है। यह मनुष्य पर निर्भर है कि वह अज्ञान में जीवन बिताए या जागरूक होकर प्रेम, क्षमा, सेवा और सद्भाव को अपनाए। सच्ची भक्ति भय, स्वार्थ या चतुराई से नहीं, बल्कि निष्काम प्रेम से की जाती है।

मनुष्य सेवा, सुमिरन और सत्संग से जुड़कर मानवता के गुणों को अपनाए, किसी को कष्ट न पहुँचाए और क्षमा व प्रेम का व्यवहार रखे। परमात्मा का प्रेम अमीर-गरीब, ऊँच-नीच या किसी भेदभाव में भेद नहीं करता; वह सभी पर समान रूप से बरसता है।

मेरठ जोन के जोनल इंचार्ज कुंवरपाल की ओर से बागपत संयोजक यशवीर ने विभिन्न स्थानों से आए हुए संत महात्माओं, भाई-बहनों का धन्यवाद ज्ञापन किया तथा प्रशासन से प्राप्त सहयोग हेतु प्रशासन का भी आभार व्यक्त किया। निसंदेह, समागम में उपस्थित संगत ने एकत्व, प्रेम और मानवता के संदेश को अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया।

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