फर्रुखाबाद।
जनपद में मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे को लेकर प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। भ्रष्टाचार और हीलाहवाली के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाला बिजली विभाग मुख्यमंत्री के डर से अचानक एक्शन मोड में आ गया। लंबे समय से उपेक्षित पड़े नवाबगंज के अठसेनी फीडर के टूटे खंभों को विभागीय अधिकारियों ने रातों-रात हटवाकर नए खंभे लगवा दिए। स्थानीय किसानों में इस घटनाक्रम को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। किसानों का आरोप है कि बिजली विभाग से ज्यादा भ्रष्ट कोई दूसरा महकमा नहीं है। आम जनता और गरीब किसानों को एक छोटे से काम के लिए महीनों दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। बिना चढ़ावे के यहां कोई फाइल आगे नहीं बढ़ती। किसानों ने सवाल उठाया कि जो काम महीनों से अटका पड़ा था, वह मुख्यमंत्री के डर से एक ही रात में कैसे पूरा हो गया? क्या गरीब किसान के पास पैसे नहीं हैं, तो उसका काम महीनों लटकाया जाएगा?

ज्ञापन देने जा रहे भाकियू स्वराज नेता नजरबंद
दूसरी ओर बिजली विभाग के भ्रष्टाचार और जनसमस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने जा रहे भारतीय किसान यूनियन स्वराज के कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष प्रमोद मिश्रा को पुलिस-प्रशासन ने रोक दिया। प्रशासन ने उन्हें उनके कार्यकर्ताओं के साथ आवास पर ही नजरबंद कर दिया, ताकि वे मुख्यमंत्री तक न पहुंच सकें।
“किसानों के हक की आवाज दबने नहीं देंगे”- प्रमोद मिश्रा
नजरबंद किए जाने के बाद भाकियू स्वराज के कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष प्रमोद मिश्रा ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि प्रशासन चाहे जितना जोर लगा ले और हमें मुख्यमंत्री तक पहुंचने से रोक ले, लेकिन वे किसानों की आवाज को नहीं दबा सकते। बिजली विभाग का भ्रष्टाचार चरम पर है और जब तक गरीब किसानों को न्याय नहीं मिलता, हम उनके हक और अधिकार की लड़ाई मजबूती से लड़ते रहेंगे। मुख्यमंत्री के डर से रातों-रात बदले गए खंभों की घटना ने बिजली विभाग की कार्यशैली की पोल खोलकर रख दी है। क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर जिम्मेदार लापरवाह अधिकारियों पर गाज कब गिरेगी।





